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मंत्री ने ही डाल दिया बाधा
कुशीनगर | वर्ष 2018 बीतने में चंद दिन शेष बचे हैं। लोगों को उम्मीद थी कि नगरपालिका पडरौना में आने वाले के गांव बढ़ेंगे तो यह गांव मुख्यधारा से जुड़ेगा और विकास के नए आयाम कायम होंगे,लेकिन लोगों की यह हसरत 2018 में भी अधूरी रह गई। नगरपालिका पडरौना से जुड़ने वाले गांव के लोगों के अरमानों पर 2018 में यहां के ही सदर सांसद भाजपा के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने राजनीतिक पेच के तहत अड़ंगा लगाकर इनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया है | परिसीमन के तहत जिन गांवों को नगरपालिका पडरौना में शामिल होना था इसके लिए खुद मंत्री श्री मौर्य नगर विकास मंत्री को पत्र लिखकर इस पर रोक लगवा दी है |
गौरतलब हो कि नगरपालिका पडरौना 1949 में अपने अस्तित्व में आई थी तथा इसका सीमा विस्तार पहली और आखिरी बार 1964 मे किया गया,जिसके बाद नगरपालिका की जनसंख्या पहले से दोगुनी हो गयी। दुसरी बार इस नगरपालिका के सीमा विस्तार की पहल 2010 में तत्कालीन जिलाधिकारी रहे एस,वी,एस रंगाराव ने किया,लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद इसके सीमाविस्तार की फ़ाइल को ठंडे बस्ते में डाल कर टरका दिया गया तथा इस नगरपालिका के सीमाविस्तार में अटका रोड़ा आठ साल बाद भी हटने का नाम नहीं ले रहा है।
बताते चलें कि इस नगरपालिका के विस्तार के लिए आसपास के ग्रामीण तथा सम्भावित नगरपालिका निवासियों ने सड़क से संसद तक की लड़ाई लड़ी, मुकदमा झेला,लेकिन उसके बावजूद भी अभी तक इस फ़ाइल पर कोई सुनवाई नहीं हुई। सूत्रों की माने तो कुछ माह पहले जब इस नगरपालिका के विस्तार के लिए लड़ाई लड़ी जा रही थी तो इसका विरोध करने वाले लोग वर्तमान नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना तक अपनी पैरवी लेकर गए थे। जिससे कि विस्तार पर रोक लगाई जा सके। लेकिन नगरपालिका परिसीमन विस्तार के इन विरोधियों को वहां से भी निराशा हाथ लगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सूबे में श्रम एवं सेवायोजन कैबिनेट मंत्री तथा सदर विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य ने शासन के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को पडरौना नगरपालिका का सीमा विस्तार रोकने के लिए पत्र लिखा है।
क्या लिखा है स्वामी ने पत्र में मन्त्री को
सदर विधायक तथा प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने नगरपालिका विस्तार को रोकने सम्बन्धी पत्र में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को लिखे पत्र में कहा है कि पडरौना नगरपालिका विस्तार से सम्बंधित सीमांकन राजनीतिक द्वेष से परिपूर्ण होकर त्रुटिपूर्ण किया गया है,उनका कहना है कि नगर की सीमा से सटे गांवों को सीमांकन में शामिल न कर सुदूरवर्ती गांवों को शामिल किया गया है। इसीलिए मौर्य ने अपने लिखे पत्र में सुव्यवस्थित सीमांकन न होने तक अगले सत्र तक इस सीमा विस्तार को स्थगित करने का अनरोध किया है।
मौर्य के लिखे पत्र के संदर्भ में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने जिलाधिकारी कुशीनगर से इस मामले पर जांच कर आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। बताते चलें कि पूर्व के दिनों में नगरपालिका में शामिल किए जाने के लिए 29 गांवों का सीमांकन हुआ था।
पूर्व में भी सीमा विस्तार के रास्ते में रोड़ा बने हैं सत्ताधारी नेता
विशेष सुत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस नगरपालिका विस्तार को रुकवाने में सबसे बड़ा हाथ यहां के सत्ताधारियों का रहा,जिनके साथ मिलकर कुछ ग्राम प्रधानों ने इस कार्य को अंजाम दिया। कुछ महीनों पूर्व जिस वक्त इस नगरपालिका विस्तार की लड़ाई लड़ी जा रही थी उस समय के तत्कालीन जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने इस मामले में आन्दोलनकारियों को भरपूर सहयोग देने का वादा किया था। लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव में आकर वह भी चुप हो गये और पडरौना नगरपालिका विस्तार का मामला ठन्डे बस्ते में चला गया। बताते चलें कि पूर्व में भाजपा के जिलाध्यक्ष जेपी शाही ने भी नगर विकास मंत्री को पत्र लिखकर नगरपालिका सीमाविस्तार को रोकने का अनुरोध किया था।
पडरौना के बाद की दो नगर पंचायतें बनी नगरपालिका, हुआ चुनाव
यहां सीमाविस्तार के मामले में मजे की बात यह है कि पडरौना के बहुत बाद में अस्तित्व में आयी नगरपंचायत कसया और हाटा का पूर्व की सरकार द्वारा विस्तार कर इनको नगरपालिका का दर्जा भी दे दिया गया तथ पूर्व में हुए निकाय चुनावों में इन दोनों निकायों में नगरपालिका का चुनाव कराया गया तथा पूर्व में जनपद की सबसे बड़ी नगरपालिका का रही पडरौना का तमगा छीनकर, जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका का दर्जा हाटा नगरपालिका को दे दिया गया तथा एक समय मे जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका रही पडरौना का स्थान सीमाविस्तार न होने से जनपद में तीसरे नम्बर पर हो गया।
अब सवाल यह उठता है कि सबसे पुरानी नगरपालिका पडरौना जिसका विस्तार अभी तक हो जाना चाहिये था। उसका विस्तार न कराकर उसके बाद के नगरपंचायतों को विस्तारित कर नगरपालिका का दर्जा दे दिया गया। इसके बाद दुदही और फाजिलनगर कस्बे को नगरपंचायत भी घोषित कर दिया गया। लेकिन जिले की सबसे पुरानी और एक समय में सबसे बड़ी नगरपालिका रही पडरौना नगरपालिका की उपेक्षा आखिर क्यों हो रही है ? यह सवाल सम्भावित नगरपालिका निवासियों के जेहन में कौंध रहा है।
पूर्व
डीएम एसवीएस रंगाराव ने की थी विस्तार की पहली पहल
डीएम एसवीएस रंगाराव ने की थी विस्तार की पहली पहल
आठ वर्ष पूर्व साल 2010 में तत्कालीन डीएम एसवीएस रंगाराव ने 29 मार्च 2010 को पडरौना नगरपालिका की सीमा विस्तार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था।
विशेष सचिव नगर विकास द्वारा जांच को भेजी गयी थी टीम
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक तत्कालीन डीएम आंद्रा वामसी के कार्यकाल में नगर विकास के विशेष सचिव द्वारा टीम भेजकर पडरौना नगरपालिका विस्तार से सम्बंधित जांच कर आख्या भी मांगी गयी थी। लेकिन सत्तापक्ष के जिलाध्यक्ष और कुछ सत्ताधारियों द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा आख्या देने पर रोक लगवा दिया गया। जिससे आसपास के ग्रामीणों की नगरपालिका विस्तार की आस एक बार फिर धरी रह गयी।
सीमा विस्तार में इन गांवों को किया जाना है शामिल
नगरपालिका पडरौना की सीमा विस्तार करने के लिए समीपवर्ती गांवों जंगल विशुनपुरा, जंगल बकुलहां, भरवलिया, जंगल बेलवा, जंगल अमवा, नोनियापट्टी, सोहरौना, बंधू छपरा भाग-एक व दो, अहिरौली बुजुर्ग, बेलवा मिश्र, बलुचहां, भिसवा सरकारी, मोती छपरा, दमवतिया, मिल्की, सेवक छपरा, परसौनी कला, अहिरौली खुर्द, पकड़ी बुजुर्ग, पटखौली, कांटी, लमुहा, पलिया, बदरौना, बसडीला, रामपुर मटिहानिया आदि राजस्व गांवों को नगरपालिका पडरौना मेँ शामिल किया जाना है।
क्या कहते हैं जिलाधिकारी कुशीनगर…………
नगरपालिका विस्तार के संदर्भ में जिलाधिकारी कुशीनगर डॉ अनिल कुमार सिंह का कहना है कि नगरपालिका सीमा विस्तार से सम्बंधित मांगे गए सभी प्रकार के ब्यौरे तैयार कराकर शासन को भेज दिए गए हैं। उनका कहना है कि पडरौना नगरपालिका विस्तार का मामला शासन स्तर पर लंबित है। अभी इस मामले में कोई नया आदेश नही आया है।
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