ब्यूरो चीफ:सैय्यद मकसूदुल हसन
अमेठी । साल 1976 की बात है. देश भर में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में भारत में लगे आपातकाल के समय क उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर ज़िले में अमेठी कस्बे के पास का खेरौना गांव जो आज जिला अमेठी में है एक दूसरी वजह से अचानक देश और दुनिया के अख़बारों की हेडलाइन बन गया था।
अमेठी से सटे इस गांव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी अपने कुछ युवा साथियों के साथ यहां पहुंचे और फ़ावड़ा चलाकर उन्होंने सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया। उनके साथ देश भर से बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस के लोग श्रमदान के लिए यहां आकर जुटे थे और उससे पहले सैकड़ों फ़ावड़े, कुदाल, टोकरे और तमाम ज़रूरी सामान यहां भेजे गये। उस समय खेरौना गांव के प्रधान थे रामनरेश शुक्ल। श्रमदान से ही संजय गांधी की राजनीति की शुरुआत हुई थी, तीन सड़कों पर श्रमदान हुआ था. बाद में तीनों सड़कें डामर हो गईं।डेढ़ महीने तक तो यहां मेला लगा था। तमाम राज्यों से लोग आ रहे थे और श्रमदान कर रहे थे, डीएम, एसपी और तमाम बड़े अधिकारी यहां डेरा डाले हुए थे।
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