Delhi Rain : रिकॉर्डतोड़ बारिश से दिल्ली पानी-पानी, सड़कें तालाब, पुल झरने बने, यकीन नहीं होता तो वीडियोज देख लीजिए !

झमाझम बरसात ने दिल्ली-एनसीआर के इलाकों का बुरा हाल कर दिया, शायद ही कोई गली कूंचा बच गया हो जहां बरसात का पानी न जमा हुआ हो। दिल्ली में 24 घंटे में यह पांचवीं सबसे ज्यादा बारिश है। दिल्ली में पिछले 27 घंटों में करीब 19-20 सेंटीमीटर बारिश हुई। आईएमडी के अधिकारियों ने बताया कि सफदरजंग ऑब्जर्वेटरी में बुधवार को सुबह साढ़े आठ बजे तक, बीते 24 घंटों में 112.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जो 19 वर्षों में सितंबर में एक दिन में सर्वाधिक बारिश है।

heavy rainfall in Delhi

लोधी रोड, रिज, पालम तथा आयानगर वेधशालाओं ने सुबह साढ़े आठ बजे तक, बीते 24 घंटों में क्रमश: 120.2 मिमी, 81.6 मिमी, 71.1 मिमी और 68.2 मिमी बारिश दर्ज की।उन्होंने बताया कि साढ़े आठ बजे से पालम, लोधी रोड, रिज और आयानगर में क्रमश: 78.2 मिमी, 75.4 मिमी, 50 मिमी और 44.8 मिमी बारिश दर्ज की।

निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी ‘स्काईमेट वेदर’ के उपाध्यक्ष महेश पालावत ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून की प्रवृत्ति बदल रही है। उन्होंने कहा, ‘पिछले चार से पांच साल में बारिश के दिनों की संख्या कम हो गई है और खराब मौसम की घटनाओं में वृद्धि हुई है। हम बारिश के छोटे और तीव्र दौर की रिकॉर्डिंग करते रहे हैं, कई बार सिर्फ 24 घंटों में करीब 100 मिमी बारिश होती है। पहले इतनी बारिश 10 से 15 दिनों में होती थी।’

आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा, ‘बारिश में कमी आएगी। सात सितंबर से बारिश का एक और दौर शुरू होने की संभावना है।’’ सितंबर के लिए अपने पूर्वानुमान में आईएमडी ने कहा, ‘उत्तरपश्चिम के कई इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से कम बारिश की संभावना है।

दिल्ली यातायात पुलिस ने भारी जलभराव के कारण मदर टेरेसा क्रीसेंट मार्ग, मायापुरी चौक, घिटोरनी मेट्रो स्टेशन से एमजी रोड और अधचिनी से किशनगढ़ की तरफ यातायात जाम रहने को लेकर परामर्श जारी किया है।

मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि तेज बारिश से भूजल स्तर बढ़ने में मदद नहीं मिलती और इससे निचले इलाकों में जलभराव हो जाता है। पालावत ने कहा कि अगर चार से पांच दिनों तक धीमी-धीमी बारिश होती है तो पानी रिसकर जमीन तक पहुंचता है।

भारी बारिश होने पर, पानी तेजी से बह जाता है। उन्होंने कहा, ‘बारिश से प्रदूषण दूर हो जाता है लेकिन बारिश के दिनों की संख्या कम होने से औसत वार्षिक वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।’

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