प्रयागराज, नए कृषि कानून को लेकर किए जा रहे आंदोलन से हमें भोजन नहीं मिलेगा। खेती ही परिवार के जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन है। सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून के विरोध में किसान दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन हम लोग ठंड के मौसम के बावजूद भी खेतों में बोई गई फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। यह कहना प्रयागराज के किसानों का है।
फूलपुर के सरवाडीह गांव की किसान सीता देवी ने कहा कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि वर्तमान समय में दो कुंतल धान बेचने पर एक बोरी डीएपी एक बोरी यूरिया और पोटास मिल रही है। किसान अपने खेतों की सिंचाई करते हुए बोले कि उन्हें समय से खाद-बीज, बिजली-पानी और उपज का सही मूल्य मिल जाए तो वही अन्नदाता के लिए सदैव लाभकारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसान जब तक अपनी मेहनत कर फसल नहीं उगाएंगे, तब तक उनका भला नहीं होगा। आशा यादव ने कहा कि इस समय खेतों में काम करने का समय है। समय से चूक गए तो साल भर परेशानी उठानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि असली किसान हर समय खेतों में काम कर अपनी जीविकोपार्जन में लगा हुआ है।
फूलपुर क्षेत्र के अरवाशी गांव के प्रगतिशील किसान लाल बहादुर सिंह तथा हरभानपुर के किसान शिव नरायण सिंह, नरेंद्र प्रताप सिंह गहरवार तथा जय सिंह ने कहा कि सरकार ने अनाज का उचित मूल्य दिलाने के लिए नया कृषि कानून बनाया है, जिसके आधार पर किसान की आय दो गुनी हो सकती है। किसान लाल बहादुर सिंह ने कहा कि देश का किसान अच्छी तरह समझ रहा है कि सरकार उसके हितों को सर्वोपरि मानकर ही नए कृषि बिल को लाई है।
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