बीजेपी के खिलाफ लगातार आक्रामक और आग उगलने वाली दीदी के इन दिनों बदले तेवर

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कुछ समय पहले तक पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगातार आक्रामक और आग उगलने वाली वेस्ट बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के तेवर इन दिनों बदले हुए दिखाई दे रहे हैं। बीजेपी व उसके शीर्ष नेतृत्व पर उनका आक्रमण न सिर्फ कम हुआ है, बल्कि पिछले दिनों वह पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से सौहार्दपूर्ण माहौल में मिलती दिखाई दीं।

सियासी गलियारों में इस मुलाकात को लेकर चर्चा गर्म

सियासी गलियारे में ममता में आए इस बदलाव को लेकर अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है। चर्चा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों और अनुच्छेद 370 के बाद बने माहौल को देखते हुए ममता ने अपने तेवरों में थोड़ी नरमी दी है। कहा जा रहा है कि साल 2021 में होने वाले राज्य के चुनावों को देखते हुए ममता ने फिलहाल अपना सारा फोकस प्रदेश के विकास, राज्य के मुद्दों, केंद्र सरकार से ज्यादा से ज्यादा अपने हिस्से में फंड और योजनाएं लाने पर लगा दिया है।

ममता ने PM से मुलाकात में दिखाए तेवर में नर्मी
ममता समझ रही हैं कि अगर केंद्र से राज्य के लिए अपनी हिस्सेदारी चाहिए तो वह लड़ झगड़ कर नहीं, बल्कि आपसी सहयोग और बातचीत से ली जा सकती है। शायद यही वजह थी कि अपनी हालिया दिल्ली यात्रा में जब पीएम मोदी से मिलीं तो उन्होंने उन्हें कोलकाता की सबसे बढ़िया समझी जाने वाली स्वीट शॉप की मिठाई ‘संदेश’ उपहार में दिए। पीएम से हुई मुलाकात में जहां उन्होंने राज्य का नाम बदलने के मुद्दे को फाइनल किया, वहीं उन्होंने बीरभूम स्थित प्रदेश के सबसे बड़े कोल ब्लॉक के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया।

पहला मुकाबला बराबर रहा
वेस्ट बंगाल की सियासत पर अपनी गहरी नजर रखने वाले विशेषज्ञों की मानें तो ममता के तेवरों में आए इस बदलाव के पीछे कहीं ना कहीं बदले हुए हालात भी हैं। जहां लोकसभा चुनाव के दौरान ममता अपनी जमीन को बचाए रखने के लिए बेताब थीं, इसीलिए बीजेपी की ओर से मिलने वाली चुनौतियों को लेकर वह लगातार हमलावर थीं। पिछले कुछ महीनों में जब हालात बदल गए हैं और चीजें ममता को अपने पक्ष में दिखाई देने लगी हैं तो उन्हें टकराव को छोड़कर आपसी सहयोग और बातचीत से आगे बढ़ने की रणनीति पर चलना ठीक लग रहा है।

बीजेपी-ममता दोनों बैकफुट पर
असम में एनआरसी लागू होने के बाद जिस तरह से वहां माहौल बना और बीजेपी बैकफुट पर आई है, उसे ममता अपने लिए बेहतर मौके के तौर पर देख रही हैं। गौरतलब है कि असम की एनआरसी लिस्ट से बाहर होनेवालों में ज्यादा तादाद हिंदुओं की है। असम की तर्ज पर बंगाल में भी एनआरसी लागू होने की बात कही जा रही है। असम का उदाहरण सामने रखते हुए ममता लगातार संकेत देती रही हैं कि वह अपने रहते बंगाल में एनआरसी नहीं लागू होने देंगी। उल्लेखनीय है कि एनआरसी को लेकर बंगाल में भी लोगों के बीच एक डर बैठा हुआ है। ममता इस डर को अपने पक्ष में संभावना के तौर पर देख रही हैं। इसके अलावा, पिछले दिनों राज्य में हुई कुछ घटनाओं के चलते भी बीजेपी बैकफुट पर आई। वहीं, ममता के रूप में आए इस बदलाव के पीछे निजी वजह भी मानी जा रही है। शारदा – नारदा मामले, भतीजे अभिषेक बनर्जी, IPS राजीव कुमार जैसे मामलों को भी ममता के तेवरों में नरमी की वजह माना जा रहा है।

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