सैनिक पिता की असामयिक मृत्यु के बाद, फौजी साथियों ने निभाई बेटी की शादी की जिम्मेदारी
यह कहानी भावनाओं से भरपूर है और दिल को छू लेने वाली है। मथुरा में एक पूर्व सैनिक की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि उसकी बेटी की शादी दो दिन बाद थी। यह एक ऐसा वाकया है जिसने ना केवल परिवार को बल्कि पूरे देश को भावुक कर दिया है। एक पिता के निधन का दुःख और बेटी की शादी की जिम्मेदारी, ऐसे में एक अनोखी कहानी सामने आई है जो हमें देशप्रेम और मानवीयता की मिसाल पेश करती है। क्या आप जानते हैं कि आर्मी ने इस दुःख के समय कैसे मदद की? आगे पढ़ते हैं और जानिए पूरी कहानी…
दुख में डूबा परिवार
पूर्व सैनिक देवेंद्र सिंह (48 वर्ष) की मथुरा के मांट-राया रोड पर सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उनके निधन की खबर से परिवार में शोक छा गया। उनकी बेटी की शादी दो दिन बाद थी और खुशियों के माहौल में अचानक मातम छा गया। पिता के गुजर जाने के बाद परिवार को बेटी के कन्यादान की चिंता सताने लगी। बेटी शादी को टालना चाहती थी, क्योंकि उसके पिता नहीं रहे, लेकिन परिजनों के दिल में दुल्हन के कन्यादान की चिंता घर कर गई थी।
फौजी साथियों का अनोखा कदम
जब देवेंद्र सिंह के रेजिमेंट को उनकी मौत की खबर मिली, तो उनके कमांडिंग ऑफिसर ने तुरंत पांच जवानों की एक टीम को गांव भेजा। यह टीम शादी की सभी रस्मों को पूरा करने और दुल्हन का कन्यादान करने के लिए गई। यह जवान सिर्फ शादी की जिम्मेदारी ही नहीं निभाए, बल्कि मेहमानों की देखभाल भी की, सभी लोगों का स्वागत किया।
यह एक ऐसा उदाहरण है जो इंसानियत और देशभक्ति का जीवंत प्रतीक है. ये जवान कमांडिंग अधिकारी ने अपनी बेटी की शादी को पूरा कराने के लिए पूरे जोर लगाया और अपने काम की ड्यूटी से हटकर परिवार की सेवा करने निकले। इस घटना से देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के भाव का उदहारण दिखता है, कैसे सैनिक अपने साथियों और उनकी परिवारों के लिए हमेशा खड़े रहते हैं।
कन्यादान और भावुक पल
सूबेदार सोनवीर सिंह, सूबेदार मुकेश कुमार, हवलदार प्रेमवीर, विनोद और बेताल सिंह ने मिलकर देवेंद्र सिंह की बेटी का कन्यादान किया। इस भावुक पल को देखकर सबकी आंखें नम हो गईं। जवानों के इस कदम की हर तरफ प्रशंसा हो रही है और सोशल मीडिया पर भी इसे खूब शेयर किया जा रहा है। दुल्हन के परिवारवालों ने अधिकारियों के इस कदम का बहुत शुक्रिया अदा किया। यह जवान, वीरों की तरह इस परिवार के दुःख की घड़ी में उनके साथ खड़े दिखे.
एक और दिल छू लेने वाली कहानी
यह पहला मौका नहीं है जब सेना ने किसी शहीद या पूर्व सैनिक के परिवार की मदद की हो। इससे पहले भी हरियाणा के जींद में CRPF के जवानों ने एक शहीद की बेटी का कन्यादान किया था। यह घटनाएं हमें बताती हैं कि हमारे सैनिक न केवल देश की रक्षा करते हैं, बल्कि मानवीयता और देशभक्ति के भावों को भी जीवित रखते हैं। सैनिक जीवन की गाथा ऐसी ही है – यह सिर्फ देशभक्ति नहीं, अपितु इंसानियत की जीती जागती मिसाल है.
Take Away Points
- पूर्व सैनिक की मृत्यु से दुखी परिवार के साथ सेना की ओर से अद्भुत सहयोग दिखाया गया।
- फौजी साथियों ने न सिर्फ़ शादी की ज़िम्मेदारी उठाई, बल्कि कन्यादान भी किया।
- इस घटना ने देशभक्ति और इंसानियत को जीवित रखने का प्रमाण दिया।
- इस घटना से सेना की तारीफ़ हो रही है और सोशल मीडिया पर इसे खूब शेयर किया जा रहा है।
- कई अन्य उदाहरण मौजूद हैं जहाँ सैनिकों ने शहीदों के परिवारों की मदद की है।

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