बिल्ला नंबर 13 बना महिला कुली लक्ष्मी की पहचान, पढ़िए लक्ष्मी की प्रेरक कहानी

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जज्बा हो तो इनसान हर मुश्किल चुनौती से लड़ सकता है। पति की मौत के बाद भोपाल की लक्ष्मी ने कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया। बिल्ला नंबर 13 उनकी पहचान है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर कुली के रूप में कार्यरत लक्ष्मी हमेशा आपको वहां मुस्कराते हुए मिल जाएंगी। वह जज्बा ही है जिसके दम पर विपरीत परिस्थिति में भी लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और मुश्किल हालातों से लड़ते हुए ना सिर्फ अपने परिवार को सहारा दे रही हैं बल्कि लाखों महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।

दरअसल, इसी वर्ष जुलाई में उनके पति की मौत हो गई। लक्ष्मी के पति इसी स्टेशन पर कुली के रूप में काम कर रहे थे। अब पति का बिल्ला नंबर 13 ही लक्ष्मी की नई पहचान है। आठ साल के बच्चे की मां लक्ष्मी कहती हैं, ‘पति की मौत के बाद मुझे मेरे बेटे को सहारा देना था। उसे एक अच्छी जिंदगी देनी थी। इसलिए मैंने यह निर्णय किया कि अब उनकी नौकरी मैं खुद करूंगी।’

‘बेटे के बेहतर भविष्य के लिए कर रही हूं’
वह कहती हैं, ‘मेरे पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है। मुझे खुद और बेटे को पालना भी है। इस नौकरी से मैं रोजाना कम से कम 50 से 100 रुपये कमा लेती हूं।’ लक्ष्मी मानती हैं कि कुली के रूप में काम करना उनके लिए आसान नहीं था। कहती हैं, ‘हां, यह बेहद मुश्किल है। पर, मेरे पास विकल्प नहीं है। बेटे के बेहतर भविष्य के लिए मुझे कुछ ना कुछ तो करना ही है।’

‘मुझे स्थाई नौकरी की जरूरत है’
लक्ष्मी यह जरूर मानती हैं कि उन्हें अपने बेटे को आगे बढ़ाने और जीवनयापन के लिए एक स्थाई नौकरी की जरूरत है। कहती हैं, ‘यहां कुछ भी निश्चित नहीं है। किसी दिन ऐसा भी होता है कि एक भी रुपये की कमाई नहीं होती। ऐसे में मैं भी एक स्थाई नौकरी चाहती हूं।’ हालांकि, लक्ष्मी इस दौरान अपने अन्य सहयोगियों का शुक्रिया करना नहीं भूलतीं, जो भारी सामान उठाने में अक्सर उनकी मदद करते हैं।

‘ग्रुप डी में नौकरी देने की अपील’
एक सहयोगी कुली महेश प्रजापति कहते हैं, ‘कई बार यात्री उन्हें महिला समझकर कहते हैं कि उनके लिए सामान काफी भारी है। ऐसे में हम लोग संबंधित यात्री को उनके हालात के बारे में समझाते हैं और जरूरत पड़ने पर खुद सामान उठाने में मदद भी करते हैं।’ प्रजापति आगे कहते हैं, ‘हमने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर लक्ष्मी को रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी देने की मांग की है।’

‘महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं लक्ष्मी’
रेलवे स्टेशन पर महिला कुली के सवाल पर लक्ष्मी के एक सहयोगी कहते हैं, ‘समाज को जो सोचना है सोचे। पर, सच्चाई यह है कि लक्ष्मी आत्मनिर्भर बनकर अपने बेटे के लिए काम करना चाहती हैं और वह कर रही हैं। बल्कि वह उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।’

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