लखनऊ कोरोना वायरस पर विश्व की पहली साइंटून आधारित पुस्तक “बाय-बाय कोरोना” का विमोचन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को किया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार द्वारा पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। इस पुस्तक को सीडीआरआई के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं साइंटून के जनक डॉ.प्रदीप के. श्रीवास्तव ने लिखा है। विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ.नकुल पाराशर और प्रकाशन विभाग के प्रमुख निमिष कपूर पुस्तक के प्रमुख संपादक और संपादक हैं।
तेरह अध्यायों में प्रकाशित इस पुस्तक में कोरोना वायरस के बारे में विस्तृत जानकारी रोचक ढंग से साइंस कार्टून्स (साइंटून्स) के जरिये दी गई है। महामारी से लेकर वैश्विक महामारी, कोविड-19 और उससे जुड़े लक्षणों, बीमारी की रोकथाम और सावधानियों को साइंटून्स के माध्यम से चित्रण किया गया है। उन्होंने बताया कि विज्ञान विषयक कार्टून्स को साइंटून्स कहा जाता है। इसके माध्यम से विज्ञान से जुड़े जटिल तथ्यों को भी आमजन के लिए बेहद रोचक एवं हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने का प्रयास किया जाता है। साइंटून्स में भारत विश्व में शीर्ष स्थान रखता है। देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में एम.एससी. पाठ्यक्रम में साइंटून्स का अध्ययन शामिल है। “बाय-बाय कोरोना” पुस्तक में शामिल एक अध्याय आर्ट ऑफ लीविंग विद कोरोना है, जिसमें विभिन्न स्थानों पर कोरोना से बचाव की जानकारी दी गई है। यह जाने-माने साइंटूनिस्ट प्रदीप के. श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई है।
डॉ.श्रीवास्तव के अलावा कई और लोगों ने इसमें अपना योगदान दिया है। डॉ.पाराशर ने कहा कि साहित्य की सचित्र प्रस्तुति हमेशा पाठकों का ध्यान बनाए रखने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। संचार के ग्राफिक आधारित वर्णन में कार्टूनों को हमेशा पसंद किया गया है। साइंटून्स के क्षेत्र में ””””बाय-बाय कोरोना”””” अपने प्रासंगिक विषय के रूप में अलग स्थान रखती है, जिसे कार्टून के रूप पेश करना एक महत्वपूर्ण पहल है। विज्ञान प्रसार के प्रमुख निमिष कपूर ने कहा कि बचाव के लिए जागरूकता अहम है, जो अंततः हमें महामारी से बचा सकती है। ऐसे में कोरोना पर यह पुस्तक बेहद लोकप्रिय होगी। ब्राजील के साओ पॉलो में भी ब्राजील इंडिया नेटवर्क द्वारा इसे लोकार्पित किया जाएगा
पुस्तक का 3डी संस्करण लाने की भी योजना है, ताकि बोलते हुए साइंटून्स को विभिन्न भाषाओं में भारत और विदेशों में पहुंचाया जा सके और इसका उपयोग कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया भर में जागरूकता के प्रसार के लिए किया जा सके।
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