अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत में रह रहे अफगानियों की चिंता बढ़ गई है. इनके सामने दो चुनौतियां हैं. पहला देश लौटने पर तालिबान का डर. दूसरा भारत में नागरिकता संशोधन कानून. ऐसे में यहां रह रहे 21 हजार से ज्यादा अफगानीदफ्तरों और दूतावासों के चक्कर काट रहे हैं और रिफ्यूजी कार्ड की मांग कर रहे हैं. अफगानिस्तान के ताजा हालात पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद भी आज चर्चा के लिए एक विशेष सत्र आयोजित कर रही है.
अफगानिस्तान लौटने की सारी उम्मीदें खत्म
भारत में अफगानी शरणार्थियों के प्रमुख अहमद जिया गनी ने बताया कि देश में फ़िलहाल 21,000 अफगान शरणार्थी हैं. उन्होंने कहा कि इन सबके पास अब अपने मुल्क लौटने का कोई कारण ही नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि अफगान शरणार्थियों के पास नौकरी व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं. उन्होंने ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ की भी मांग की. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत आने वाले अफगानियों को ई-वीजा दिया जाएगा.
अफगान नागरिकों को अपने जान का खतरा
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद कई अफगान नागरिकों को अपने जान का खतरा है और वो मुल्क छोड़ कर भाग रहे हैं. ऐसी स्थिति में भारत सरकार यहां आने की आने की इच्छा रखने वालों को आपात स्थिति के तहत वीजा दे सकती है, जो पहले 6 महीने के लिए वैध रहेगा. ऑनलाइन याचिकाओं पर नई दिल्ली में विचार किया जाएगा. हालांकि, भारत ने यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन पर साइन नहीं किए थे.
इसलिए काबुल नहीं लौटना चाहतीं अफगानी लड़कियां
10 वर्षीय अफगान शरणार्थी ज़रीफ़ा ने कहा, ‘हम 2016 में यहां पहुंचे थे. हम कनाडा में फिर से बसना चाहते हैं. मैं पढ़ना चाहती हूं. अब अफगानिस्तान वापस जाना हमारे लिए संभव नहीं है. तालिबान हमारी हत्या कर देगा.’ एक अफगान शरणार्थी मसला ने कहा कि वह अमेरिका में फिर से बसना चाहती हैं. वह अपने परिवार के साथ पिछले 7 वर्षों से भारत में रह रही है. हाल ही में कनाडा के दूतावास के बाहर भी अफगानी शरणार्थियों ने प्रदर्शन किया था.
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