डेस्क। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपनी टिप्पणी को लेकर, दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
29 मार्च को, राणे ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि 10 मार्च को धुले पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 41 A के तहत नोटिस जारी किया, जिसमें जांच अधिकारी को गिरफ्तारी से पहले पेश होने का नोटिस जारी करना अनिवार्य है।
महाराष्ट्र सरकार ने 30 सितंबर को उच्च न्यायालय को बताया था कि नासिक साइबर पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में राणे को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा के अपने आश्वासन की अगली सुनवाई तक की अवधि बढ़ा दी गई है। यह आज तक जारी है। बता दें नासिक के अलावा, महाड, ठाणे, पुणे, जलगांव और अहमदनगर में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके खिलाफ राणे ने पिछले साल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
उसी घटना के संबंध में शिवसेना कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई शिकायतों के आधार पर नारायण राणे के खिलाफ कुल 10 मामले दर्ज किए गए थे। ये पुणे, पुणे ग्रामीण, दो प्राथमिकी नासिक ग्रामीण, धुले, अहमदनगर, जलगांव, ठाणे, नासिक और रायगढ़ जिले के महाड में थीं, जहां यह घटना हुई थी।
प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (बी) (आरोप, राष्ट्रीय एकता के लिए पूर्वाग्रही दावे), 500 (आपराधिक मानहानि), 505 (2) (उकसाने का इरादा) शामिल हैं।
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