भारत का विश्व स्वास्थ्य संगठन को ऐतिहासिक योगदान

भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कोर कार्यक्रमों के लिए 2025 से 2028 तक 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। यह राशि WHO के लिए कोर फंडिंग में छठा सबसे बड़ा योगदान है और दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे अधिक योगदान है। यह योगदान WHO के ग्लोबल प्रोग्राम ऑफ़ वर्क के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसमें पारंपरिक चिकित्सा केंद्र, डिजिटल स्वास्थ्य और WHO के क्षेत्रीय कार्यालय के लिए नई इमारत सहित कई पहलुओं में धन का उपयोग शामिल है। यह दान WHO के सामने मौजूद धन की कमी को पूरा करने और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में मददगार होगा।

पारंपरिक चिकित्सा पर केंद्रित धन आवंटन

भारत ने WHO के पारंपरिक चिकित्सा केन्द्र उत्कृष्टता के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर का सबसे बड़ा योगदान दिया है। यह राशि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के अनुसंधान, विकास और प्रसार के लिए समर्पित होगी।

पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक महत्व

आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ सदियों से स्वास्थ्य देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। इन पद्धतियों के वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकरण से वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सकता है। भारत का यह योगदान पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मंच पर लाने और उसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

केंद्र उत्कृष्टता की स्थापना

इस धनराशि से WHO पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा जो अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करेगा। यह केंद्र पारंपरिक चिकित्सा की सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद करेगा और इसे आधुनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एकीकृत करने में योगदान देगा।

डिजिटल स्वास्थ्य और अन्य पहलें

भारत द्वारा दिये गए 30 करोड़ डॉलर में से 1 करोड़ डॉलर डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के लिए आवंटित किया गया है। यह धन डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के विकास और उपयोग में मदद करेगा जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।

डिजिटल स्वास्थ्य का महत्व

डिजिटल स्वास्थ्य तकनीक, जैसे टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थ ऐप और स्वास्थ्य डेटा एनालिटिक्स, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए लाभदायक साबित होगा।

WHO क्षेत्रीय कार्यालय और अन्य पहल

इसके अतिरिक्त, भारत ने WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के लिए एक नए परिसर के निर्माण के लिए 3.8 करोड़ डॉलर और थीमैटिक फंडिंग के लिए 46 लाख डॉलर का योगदान दिया है। यह योगदान WHO की क्षेत्रीय गतिविधियों और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगा।

वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भारत की भूमिका

भारत का WHO के लिए यह महत्वपूर्ण आर्थिक योगदान वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह योगदान न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र और विश्व के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैश्विक सहयोग और साझेदारी

इस धनराशि के साथ अन्य देशों और संगठनों द्वारा किये गए योगदान से WHO को अपने वैश्विक स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह वैश्विक स्तर पर सहयोग और साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है।

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति

WHO के कार्यक्रमों को धन उपलब्ध कराने से सतत विकास लक्ष्यों, खासकर स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह विश्व भर में लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देगा।

निष्कर्ष (Take Away Points)

  • भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लिए 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक का योगदान किया है जो दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे बड़ा योगदान है।
  • इस धन का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा, डिजिटल स्वास्थ्य और WHO के क्षेत्रीय कार्यालय के लिए किया जाएगा।
  • यह योगदान वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • भारत का यह कदम वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग और साझेदारी का एक मजबूत उदाहरण है।
  • इस योगदान से WHO को अपने कोर कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से चलाने में मदद मिलेगी और इससे वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार आएगा।

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