चुनावी घोषणापत्र : कांग्रेस मैदान से लेकर पहाड़ तक चढ़ी और अब पाताल में भी उतरी , Read Full Story !

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नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ में चुनावी घोषणापत्र तैयार करने के लिए कांग्रेस मैदान से लेकर पहाड़ तक चढ़ी और अब पाताल में भी उतर गई है। घोषणापत्र तैयार करने की जिम्मेदारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव की है। कोयला मजदूरों की समस्या जानने के लिए वे गमबूट और हेलमेट पहनकर कोयले की खतरनाक भूमिगत खदानों में उतर गए। कांग्रेस उन सभी जगहों पर पहुंच रही है जहां जनता की समस्याओं को समझने की गुंजाइश है।

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Singdev singh

इसी आधार पर इस बार जमीनी घोषणापत्र बनाने की कवायद की जा रही है। छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस बहुत कुछ पहली बार कर रही है। चाहे वह संगठन का बूथ स्तर तक विस्तार हो या प्रत्याशी चयन का formula या फिर चुनावी घोषणापत्र तैयार करने की मशक्कत। इस बार घोषणापत्र के मुद्दे जुटाने के लिए कांग्रेस ने मैदानी इलाकों में बिलासपुर, जांजगीर-चांपा का दौरा किया, वहीं पहाड़ी इलाकों में सरगुजा और बस्तर के गांवों की यात्र की।

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कोरिया जिला पहुंचे तो सिंहदेव चिरमिरी के भूमिगत कोयला खदान में उतर गए। सुरक्षा के लिए गमबूट और हेलमेट भी पहना। पार्टी की कोशिश है कि ऐसा कोई भी वर्ग न बचे, जिससे घोषणापत्र के लिए उसका सुझाव न लिया गया हो। कांग्रेस हाईकमान से घोषणापत्र बनाने की जिम्मेदारी मिलने के बाद सिंहदेव ने पहले तो एक कार्यालय खुलवाया, जहां जनता से सुझाव मंगाए।

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बात कुछ जमी नहीं तो खुद ही एक-एक जिलों के दौरे पर निकल पड़े। 27 में से 16 जिलों का दौरा वे कर चुके हैं। हर जिले के प्रबुद्ध वर्ग डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, बड़े व्यापारियों, शिक्षक आदि से सुझाव लिया जा रहा है, तो फुटपाथ पर मनियारी (चूड़ी-बिंदी) का सामान या सब्जी बेचने वाले छोटे व्यापारी, मजदूर, किसान से लेकर रिक्शा व ठेले चलाने वालों तक से उनकी जरूरत पूछी जा रही है।

विधानसभा के प्रतपिक्ष सरगुजा के महाराजा टीएस सिंहदेव ने आज सामंतवादी सीमाओं को तोड़कर समाज के सबसे निचले वर्ग के स्वीपरों के साथ भी खाना खाया।

कमजोर वर्ग के लोग चर्चा में संकोच न करें, इसके लिए किसी के साथ खेत में रोपा लगाया तो कहीं साथ बैठकर खाना खाया। सूत्रों का कहना है कि इस माह तक सभी जिलों का दौरा पूरा हो जाएगा। उसके बाद जनता की जरतों और सुझावों को सूचीबद्ध किया जाएगा। सामान्य लगने वाले मुद्दे अलग किए जाएंगे, जो कि पहली प्राथमिकता के साथ घोषणापत्र में शामिल होंगे।

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