महावीर स्वामी जयंती:- जानें महावीर स्वामी के उपदेश और स्त्रियों के विषय मे तर्क

लाइफस्टाइल- जैन समुदाय का प्रमुख पर्व महावीर जयंती इस साल 4 अप्रैल को मनाया जा रहा है। इस दिन महावीर स्वामी का जन्म हुआ था। यह जैन समुदाय के 24 वें तीर्थंकर थे।महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्धमान था। इनके पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं।

जैन धर्म की स्थापना किसने किया इसका श्रेय किसी को नहीं दिया गया है। कर्म और ज्ञान के आधार पर जैन धर्म के तीर्थंकर हुए। महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर थे। जैन धर्म मे तीर्थंकर उस व्यक्ति को कहा जाता है जो सांसारिक सुख का त्याग करता है, मोह माया से विरक्त हो जाता है और लोगों को धर्म का पाठ पढ़ाता है।

महावीर स्वामी के उपदेश-

जैन धर्म के ग्रंथ आचारांग सूत्र के मुताबिक महावीर स्वामी एक साधु थे। वह अकेले रहते थे। उनका जीवन भ्रमण करना और लोगों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना था। महावीर स्वामी ने अपनी भ्रमण यात्रा को 30 वर्ष की आयु में आरम्भ किया और 42 वर्ष तक यह भ्रमण करते रहे।
महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध में एक बात समान थी कि उन्होंने आम आदमी को उपदेश नहीं दिया। महावीर स्वामी अपने अनुयायियों को उपदेश देते थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को असत्य से दूर रहने, मैथुन को त्यागने, हिंसा का विरोध करने, सांसारिक वस्तुओं का त्याग करने का उपदेश दिया।

जैन धर्म के मुताबिक स्त्रियां-

जैन ग्रंथो के मुताबिक स्त्रियों को लेकर महावीर स्वामी के कई अलग विचार थे। उनका मानना था कि महिलाएं कभी सन्यासी नहीं बन सकती हैं। महिलाओं में सबसे अधिक प्रलोभन होता है। उनके भीतर अंडाशय का निर्माण होता है जो मासिक धर्म के दौरान मर जाते हैं।
कई लोगों का कहना है कि महावीर स्वामी के धर्म को मानने के लिए जिन नियमों को बनाया गया वह बेहद कठिन थे। उनका पालन करना आसान नहीं है। यही कारण है कि जैन धर्म का प्रसार-प्रचार भारत में भी कम हुआ है और विश्व स्तर पर भी जैन धर्म को लोग नहीं जान पाए।

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