महाराष्ट्र : MLC नहीं बना रहे गवर्नर, कुर्सी खतरे में देख उद्धव का मोदी को फोन

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मुंबई। महाराष्ट्र में कोरोना संकट के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी भी डगमगाने लगी है। महाराष्ट्र कैबिनेट ने दो बार उद्धव ठाकरे को एमएलसी नामित करने के लिए प्रस्ताव पास कर भेजा, लेकिन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पीएम नरेंद्र मोदी को फोन कर महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। पीएम मोदी ने उन्हें जल्द से जल्द मामले को हल कराने का आश्वासन दिया है।

सूत्रों ने बताया कि बुधवार को उद्धव ठाकरे ने पीएम नरेंद्र मोदी को फोन किया। उन्होंने पीएम मोदी को महाराष्ट्र के सियासी संकट से अवगत कराते हुए कहा कि राज्य में कोरोना संकट चरम पर है। इसी बीच राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है। महाराष्ट्र जैसे इतने बड़े राज्य में राजनीतिक अस्थिरता सही नहीं है, इससे आम जनता में गलत संदेश जाएगा। ठाकरे ने पीएम मोदी से इस विषय पर गौर करने का आग्रह किया है। बताया जा रहा है कि उद्धव की बातें सुनकर पीएम मोदी ने उन्हें मामले को जल्द देखने की बात कही है। बता दें कि उद्धव ठाकरे को 28 मई से पहले संविधान के अनुसार किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है।

महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (Maharashtra Vikas Aghadi) सरकार का समर्थन करने वाले चार छोटे दलों के नेताओं ने बुधवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एमएलसी नामित करने के राज्य मंत्रिमंडल के प्रस्ताव पर निर्णय लेने का आग्रह किया। कोश्यारी को भेजे अपने संयुक्त पत्र में, सत्तारूढ़ एमवीए का समर्थन करने वाले दलों के नेताओं ने कहा कि राज्यपाल को कारणों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अब तक ठाकरे को क्यों नहीं नामित है।

किसान और वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के नेता जयंत पाटिल, जनता दल (एस) के महाराष्ट्र अध्यक्ष शरद पाटिल, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन (एसएसएस) के राजू शेट्टी और आरपीआई (एस) के नेता श्याम गायकवाड़ ने यह पत्र भेजा है। पत्र में इन दलों ने कहा कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने राज्य के विधान परिषद में ठाकरे की नियुक्ति करने का प्रस्ताव पहले 9 अप्रैल को भजा था और उन्हें 28 अप्रैल (मंगलवार) को इसके बारे में याद दिलाया था, लेकिन अब तक निर्णय लिया जाना बाकी है।

महाराष्ट्र के सियासी संकट के बीच अब सबकी नजरें सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर टिकी हुई हैं। उद्धव कैबिनेट के सदस्य ने कहा कि कोश्यारी ने हमारी बात सुनी लेकिन उनका रवैया टाल-मटोल वाला रहा। इसलिए हमें नहीं पता कि वह हमारी याचिका को स्वीकार करेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि ठाकरे के नामांकन पर अनिश्चितता के मद्देनजर सरकार विधान परिषद चुनावों के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करने पर विचार कर रही है।

पहले की योजना के अनुसार नौ सीटों के लिए 24 अप्रैल को चुनाव होने थे और ठाकरे को चुनाव लड़ना था। हालांकि कोरोना वायरस की वजह से आयोग ने चुनाव को स्थगित कर दिया। इसी वजह से मुख्यमंत्री चाहते हैं कि राज्यपाल अपने कोटे की खाली पड़ी दो सीटों में से एक पर उन्हें नामित कर दें।

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