आलू का भाव बढ़ा तो , साइज में छोटा हो गया समोसा

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तकरीबन हर जुबां पर रचने-बसने वाले समोसे का स्वाद इन दिनों महंगाई की चपेट में है। इसका दाम इन दिनों चर्चा में भी है। अब तक मध्यम श्रेणी की दुकानों पर 6-7 रुपये प्रति नग बिकने वाले इस लोकप्रिय आइटम ने दहाई का रेट यानी कि 10 रुपये प्रति नग छू लिया है। आमो खास के बीच उम्दा नाश्ते के रूप में मौजूद इस स्नैक के बिगड़े समीकरण की प्रमुख वजह आसमान चढ़े आलू व तेल के दाम को बताया जा रहा है। उधर, संकटग्रस्त समोसे का बाजार हथियाने के लिए गोभी की पकौड़ी ने पींगे मारनी शुरू कर दी है।

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अब तक मध्यम श्रेणी की दुकानों पर 6-7 रुपये प्रति नग बिकने वाले समोसे ने अब दहाई का रेट यानी कि 10 रुपये प्रति नग छू लिया है। ऐसा आलू का भाव बढ़ने के कारण हो रहा है।

आलू के आसमान चढ़े भाव ने बिगाड़ा नाश्ते का समीकरण

अपने शहर में भी मीठी चटनी और छोले के साथ समोसा खाना लोगों को काफी पसंद है। चार सौ से ज्यादा दुकानों पर सुबह से लेकर देर शाम तक करीब 25 हजार से ज्यादा समोसे की बिक्री होती है। गोरखनाथ, बक्शीपुर समेत कई जगहों पर समोसा खरीदने के लिए अकसर लाइन लगती है, लेकिन आलू और तेल की बढ़ती कीमतें समोसे का जायका खराब कर रही हैं। आमतौर पर 15 से 25 रुपये किलो बिकने वाला आलू 55 से 60 और 70 से 75 रुपये लीटर वाला तेल 110 रुपये पहुंचा तो दुकानदारों से कीमत बढ़ानी शुरू कर दी। जिन्होंने दाम नहीं बढ़ाया उसने साइज छोटा कर दिया।

सभी की इस पसंद को टक्कर दे रही गोभी की पकौड़ी

सस्ते और स्वादिष्ट समोसे के लिए मशहूर जाफरा बाजार के अफसर हुसैन बताते हैं कि परता नहीं पड़ रहा था इसलिए समोसे का चार से बढ़ाकर सात रुपये करना पड़ा। आलू और तेल का दाम कम होते ही समोसे की कीमत घटा दूंगा। हाल्सीगंज के समोसा विक्रेता सुजीत कुमार मोदनवाल के मुताबिक दस रुपये से कम पर बेचने पर मुनाफा नहीं होगा। एक बार में सीधे चार रुपये दाम नहीं बढ़ा सकते इसलिए बीच का रास्ता निकाला गया है। मामूली कीमत बढ़ाने के साथ-साथ साइज में कटौती की गई है। दूसरी तरफ समोसा महंगा होने के कारण लोग गोभी की पकौड़ी पसंद कर रहे हैं। दस रुपये में कहीं चार तो कहीं तीन पकौड़ी मिल रही है।

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