संभल हिंसा: क्या मस्जिदें अब निशाना बन रही हैं? शिया धर्मगुरु का दर्दनाक इज़हार
क्या आप जानते हैं कि यूपी के संभल में हुई हिंसा ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है? क्या वाकई में मस्जिदें अब निशाना बन रही हैं? शिया धर्मगुरु कल्बे सिब्तैन ने इस घटना को बेहद अफसोसनाक बताया है और आम मुसलमानों की चिंता को जाहिर किया है. आइये, जानते हैं पूरी कहानी…
संभल हिंसा: एक दर्दनाक सच्चाई
संभल में हुई हिंसा की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. तीन नौजवानों की मौत हो गई, और कई घायल हुए. यह घटना सिर्फ़ हिंसा की नहीं, बल्कि एक बड़े सवाल की भी निशानी है: क्या मस्जिदों को अब जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है?
मस्जिदों पर सर्वे: एक बढ़ता सवाल
कल्बे सिब्तैन के अनुसार, मस्जिदों पर सर्वे का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है. कई बार, बिना मुस्लिम पक्ष को सुने, एकतरफा सर्वे के आदेश दिए जा रहे हैं. यह एक बड़ी चिंता का विषय है, जो धार्मिक सौहार्द को खतरे में डालता है.
आरएसएस प्रमुख का बयान: अनसुना सच
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने हर मस्जिद में मंदिर ढूंढने की कोशिश ना करने का आह्वान किया था, कल्बे सिब्तैन ने कहा कि इस महत्वपूर्ण बयान को भी अनसुना कर दिया जा रहा है. यह एक गंभीर बात है और साफ़तौर पर ये सवाल उठाती है कि क्या वाकई कुछ ताकतें मस्जिदों को निशाना बनाना चाहती हैं?
एक समाधान: मस्जिदों की चाबियाँ सौंपना?
इस स्थिति से निपटने के लिए कल्बे सिब्तैन ने एक विचार रखा है: सभी मस्जिदों की चाबियाँ उन संगठनों को सौंप देना जो हिंसा फैलाने में शामिल नहीं हैं और अपने घरों में नमाज पढ़ना शुरू कर देना. यह बात ज़रूर विचलित करने वाली लग सकती है, लेकिन यह उनकी चिंता की गहराई को दर्शाता है.
एक बढ़ती हुई बेचैनी
लाखों मुसलमानों के दिल में यह डर बैठ गया है कि उनकी मस्जिदें निशाना बन सकती हैं. यह डर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के बिल्कुल विपरीत है. यह बेहद अफ़सोसजनक है कि एक ऐसा माहौल पैदा हो रहा है जहाँ एक धार्मिक समुदाय को खुद को असुरक्षित महसूस करना पड़ रहा है.
राजनीतिक दलों की ज़िम्मेदारी
कल्बे सिब्तैन ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे राजधर्म निभाएँ और सभी के साथ इंसाफ़ करें. उन्होंने कहा कि सभी को समान न्याय मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी समुदाय से हो.
कुंदरकी उपचुनाव और सर्वे का सवाल
उन्होंने कुंदरकी उपचुनाव में बीजेपी को मिले मुस्लिम वोटों का ज़िक्र करते हुए सवाल उठाया कि मतगणना के अगले दिन ही सर्वे क्यों शुरू कर दिया गया. उन्होंने इस जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए संदेह जताया कि क्या इसके पीछे कोई साज़िश है?
आगे का रास्ता: न्याय और सौहार्द
संभल हिंसा की घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए, कल्बे सिब्तैन ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और बेगुनाहों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि ऐसे हालात न बनें जिससे मुस्लिम वर्ग को अन्याय का शिकार होना पड़े.
भविष्य के लिए सबक
संभल की घटना से सबक सीखते हुए, हमें धार्मिक सौहार्द और न्यायपूर्ण व्यवहार को प्राथमिकता देनी चाहिए. सभी को कानून के सामने समान समझा जाना चाहिए, और किसी भी तरह की भेदभाव पूर्ण कार्रवाई अस्वीकार्य है. सभी को मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहाँ सभी समुदाय शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें।
Take Away Points
- संभल हिंसा की घटना ने धार्मिक सौहार्द पर सवाल उठाया है.
- मस्जिदों पर सर्वे और बढ़ता डर एक बड़ी चिंता है.
- राजनीतिक दलों को राजधर्म निभाना चाहिए और सभी के साथ इंसाफ़ करना चाहिए.
- न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है।
- धार्मिक सौहार्द बनाए रखना और सभी समुदायों के बीच समानता स्थापित करना आवश्यक है।

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