जेके सीमेंट के सीईओ यदुपति सिंहानिया का सिंगापुर में निधन, उद्योग जगत में शोक की लहर

कानपुर शहर के उद्योगपति जेके परिवार में गुरुवार की सुबह दुख की घड़ी लेकर आई। जेके सीमेंट के सीईओ यदुपति सिंहानिया का गुरुवार सुबह ग्यारह बजे सिंगापुर में निधन हो गया। वह काफी दिनों से बीमार थे और सिंगापुर के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

कानपुर शहर के जेके समूह के परिवार में गुरुवार की सुबह दुखद सूचना से शोक छा गया। जेके सीमेंट में सीईओ यदुपति सिंहानिया काफी समय से बीमार चल रहे थे। स्वजन सिंगापुर के अस्पतला में भर्ती कराकर उनका इलाज करा रहे थे। सिंगापुर में उनके साथ मां सुशीला सिंहानिया व परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। गुरुवार की सुबह करीब ग्यारह बजे उन्हाेंने अंतिम सांस ली।

जेके सीमेंट के सीईओ यदुपति सिंहानिया का सिंगापुर में निधन, उद्योग जगत में शोक की लहर
काफी समय से बीमार चल रहे उद्योगपति यदुपति सिंहानिया का सिंगापुर के अस्पताल में इलाज चल रहा था वहां पर उनके साथ मां और परिवार के अन्य सदस्य थे।

उनके निधन की जानकारी मिलते ही उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वह वर्ष 2004 में जेके सीमेंट के सीईओ बने थे और दो वर्ष पहले उन्हें सीमेंट के क्षेत्र में बेस्ट सीईओ के अवार्ड से नवाजा गया था। उन्होंने देश के शीर्ष 100 सीईओ में 28 वां स्थान हासिल किया था। उन्होंने कंपनी के लिए 20 बिलियन डालर का लक्ष्य तय किया था जो 2023 में पूरा होना था।

भारत के सबसे पुराने और सबसे समृद्ध उद्योगपति परिवारों में से एक है जेके समूह परिवार के सदस्य 65 वर्षीय यदुपति सिंघानिया बेहद सरल और मृदुभाषी थे। वह अभी तक कानपुर के 90 वर्षीय कमला टावर्स का संचालन करते रहे। उन्हें सीमेंट ऑफ किंग के नाम से भी जाना गया और उन्होंने अपने कुशल प्रबंधन से जेके सीमेंट उद्योग को दुनिया की बुलंदियों तक पहुंचाया। उनके करीबी बताते हैं कि महज 3 साल में उन्होंने 500 करोड़ रुपये की कंपनी को करीब 6500 करोड़ रुपये की विशाल कंपनी में तब्दील करके दिखाया।

इसीलिए किंग ऑफ कानपुर कहे जाने वाले यदुपति सिंहानिया को सीमेंट इंडस्ट्री के सर्वश्रेष्ठ सीईओ से सम्मानित किया गया था। दुनिया की शीर्ष 30 सीमेंट कंपनियों की रैंकिंग हर साल जारी होती है, इस सूची में व्हाइट सीमेंट सेगमेंट में जेके सीमेंट को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी का स्थान मिला था। वह अपनी मां से बेहद प्रेम करते थे और कोई भी काम शुरू करने से पहले और उपलब्धि मिलने पर उनका आशीर्वाद जरूर लेते थे।

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