कुशीनगर में देहात से शहर में शामिल होकर नगरपालिका पडरौना की अभिलेखों के पन्नों में इतिहास बन गया 18 गांव

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पडरौना,कुशीनगर : जनपद के लिए गुजरता साल इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। इस साल कुशीनगर का पूरा मानचित्र ही बदल गया। जनपद में देहात को पुनर्गठन करके न सिर्फ इसे शहर में बदल दिया गया,बल्कि मानो एक इतिहास बनकर रह गए। यही नहीं,कुशीनगर में पहली बार गांव से शहर में शामिल हुए लोग नगर पालिका पडरौना में अब चुनाव भी लड़ सकते हैं।
नए साल का तोहफा नगरपालिका पडरौना में शहर में शामिल हुआ 18 गांव
युपी सरकार ने 2019 के इस वर्ष के आखिरी महीने में ही नगर पंचायत व नगरपालिका की इर्द गिर्द आने वाले गांव को जोड़कर देहाती लोगों को शहरवासी बना दिया। सरकार के ऐसे फैसले थे जिनकी उम्मीद यहां के कुशीनगर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष गिरीशचंद्र चतुर्वेदी,बसपा नेता साहिद लारी के आलावा में विभिन्न लोगों ने भी की थी। सरकार इस आदेश के साथ ही कुशीनगर के विभिन्न गांव देहात से होकर शहर में शामिल होकर नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत अभिलेख के पन्नों में  दर्ज हो गया। हालांकि कुशीनगर के लोग वषों से गांव को शहर में बसाने की मांग कर रहे थे,लेकिन पडरौना के ही कुछ लोग इस मामले में रोडा बन रहे। युपी सरकार ने गांव को नगर बना दिया,बावजूद इस सरकार के इस फैसले का पडरौना के गांवों से आने वाले लोगों ने स्वागत किया। सरकार के इस फैसले से पडरौना शहर का पूरा मानचित्र ही बदल गया। जबकि सरकार ने पडरौना शहर में शामिल हुए गांवों का नाम जोड़ कर नया मानचित्र भी जारी कर दिया है।
गांव से शहर में शामिल होने कि लडाई हुई बंद
इस साल सरकार ने गांव को शहर में शामिल करने को लेकर लडी जा रही लड़ाई को भी हटा दिया। यही नहीं गांव को शहर में शामिल होने पर बकायदा उनका नाम दर्ज कर चस्पा भी कर दिया। यह ऐसे मामले थे जिन पर कई सालों से चर्चा हो रही थी,और कई वर्षों से कुशीनगर सिविल सोसायटी से जुड़े गिरीशचंद्र चतुर्वेदी की अगुवाई में चल रही लडाई युपी सरकार से लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग कर रही थी। इसके साथ ही जनपद के नगरपालिका परिषद पडरौना शहर में 18 गांव शामिल हो गया। पहले गांव में रहने के कारण देहात का कोई भी नागरिक पडरौना शहर में मतदाता नहीं बन सकता था।अब ऐसा नहीं है सरकार के इस कदम के बाद नगर में शामिल हुए गांव का नागरिक मतदाता बनने के साथ अब मतदान करने के आलावा नगरपालिका परिषद पडरौना का चुनाव लडने में भी हकदार हो गया।
आधी आबादी को मिला हक
नगरपालिका परिषद पडरौना जनपद का एक ऐसा पुराना शहर था जहां पर आधी आबादी अर्थात लोगों को अपने गांव से शहर में जुड़ने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। पडरौना में गांव से जुड़े लोगों को शहर में शामिल होने पर उन्हें अब लंबी लड़ाई के बाद इसका फल मिल गया,अब इन्हें शहर का बिजली पानी,सड़क,मुहैया होना शुरू हो जायेगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो पडरौना शहर में शामिल हो चुके 18 गांव के लोग आने वाले समय में नगरपालिका चेयरमैन के चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने के साथ-साथ चुनाव भी लड़ सकेंगे।
गांव से पड़रौना शहर में शामिल होने से होगा चतुर्दिक विकास : शिवकुमारी
पुर्व नगरपालिका परिषद की चेयरमैन शिवकुमारी देवी ने कहा वर्षों से पडरौना नगरपालिका सीमा विस्तार का मामला लंबित चल रहा था। मेरे कार्यकाल में सीमा विस्तार से जुड़े गांव की जनता द्वारा विशेष मांग और गांवों के विकास की प्राथमिकता को देखते हुए मेरे कार्यकाल के दौरान हुई बोर्ड की बैठक में सीमा विस्तार के प्रस्ताव को मौजूद सदस्यों ने पारित कर दिया था। सदस्यों के प्रस्ताव को नगरपालिका द्वारा शासन को भेज इस पर त्वरित विस्तार की कार्रवाई को पूर्ण करने की मांग की गई थी,लेकिन कुछ लोगों के हस्तक्षेप के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। बाद में मामला कोर्ट में विचाराधीन था और इसको लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास को कोर्ट द्वारा फटकार भी लगाया गया। अब जब कोर्ट से परिसीमन विस्तार के लिए हरी झंडी दे दी गयी तो शासन ने भी इसे मंजूरी देते हुए जिला प्रशासन को पत्र जारी कर कर दिया है। पडरौना नगरपालिका सीमा विस्तार होने से शहर समेत आसपास के जो गांव शामिल हो रहे हैं उनका विकास तेजी से होगा।

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