गुजारा भत्ता: तलाक के बाद महिलाओं के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
क्या आप तलाक के बाद महिलाओं को मिलने वाले गुजारा भत्ते के नियमों से वाकिफ हैं? क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस बारे में एक ऐसा फैसला दिया है जिससे देशभर में तलाकशुदा महिलाओं के अधिकारों पर सीधा प्रभाव पड़ने वाला है? इस लेख में हम आपको तलाक के बाद मिलने वाले गुजारा भत्ते से जुड़े सभी अहम पहलुओं पर विस्तृत जानकारी देंगे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश और कानूनी प्रावधान भी शामिल होंगे।
तलाक के बाद महिलाओं का अधिकार: एक नज़र
भारत में, तलाक के बाद महिलाओं और बच्चों के जीवनयापन के लिए गुजारा भत्ता देना कानूनी तौर पर पति का दायित्व है। ये अधिकार सीआरपीसी की धारा 125 और नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 में निहित है। लेकिन कितना गुजारा भत्ता दिया जाए, यह अक्सर विवाद का विषय बनता है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बेहद अहम है।
सुप्रीम कोर्ट के 8 दिशानिर्देश: गुजारा भत्ते का निर्धारण कैसे होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ते (एलिमनी) के निर्धारण के लिए 8 अहम दिशानिर्देश तय किए हैं। ये कोई कठोर नियम नहीं, बल्कि गाइडलाइंस हैं, जिनका इस्तेमाल करते हुए मजिस्ट्रेट तलाकशुदा महिला के गुजारा भत्ते की राशि तय करेंगे। ये दिशानिर्देश हैं:
1. सामाजिक और आर्थिक स्थिति:
पत्नी की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखा जाएगा। क्या वह किसी उच्च वर्ग से ताल्लुक रखती थी और उसकी जीवनशैली कैसी थी, यह भी महत्वपूर्ण है।
2. पत्नी और आश्रित बच्चों की जरूरतें:
पत्नी और बच्चों की बुनियादी ज़रूरतों, जैसे खाना, कपड़े, रहन-सहन आदि, पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। किसी विशेष चिकित्सा आवश्यकता या शिक्षा की लागत को भी ध्यान में रखा जाएगा।
3. पत्नी और आश्रित बच्चों की योग्यताएं और रोजगार की स्थिति:
क्या पत्नी अपनी आजीविका के लिए खुद कमा सकती है? उसकी शैक्षिक योग्यताएँ और कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर भत्ते की राशि प्रभावित होगी।
4. आवेदक की कमाई और संपत्ति:
पति की आय और संपत्ति का मूल्यांकन होगा। उसकी कमाई के अनुसार ही वह कितना गुजारा भत्ता दे सकता है, इसका आंकलन होगा।
5. ससुराल में पत्नी किस तरह रहती थी:
यह गाइडलाइन संयुक्त परिवारों में औरतों के ससुराल में कैसे रहने की स्थितियों को संदर्भित करती है, जिससे पारिवारिक वातावरण और उसकी सुरक्षा में पारस्परिक समायोजन की आवश्यकता को स्पष्ट किया गया है।
6. पारिवारिक जिम्मेदारी के लिए क्या नौकरी भी छोड़ी गई थी:
अगर पत्नी ने अपने परिवार की जिम्मेदारी के चलते अपनी नौकरी छोड़ दी थी, तो उसे भी ध्यान में रखा जाएगा।
7. किसी तरह का कोई रोजगार नहीं करने वाली पत्नी का मुकदमेबाजी में होने वाला खर्च:
न्यायालय में मुकदमा लड़ने से जुड़े सभी वित्तीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
8. पति की आर्थिक क्षमता, उसकी कमाई और गुजारा भत्ता की जिम्मेदारी:
यह पति की समग्र वित्तीय स्थिति का आकलन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि गुजारा भत्ता की राशि पति के लिए बोझ न बने, लेकिन महिला और बच्चे को सुरक्षित भविष्य प्रदान करे।
गुजारा भत्ता मिलने के हालात और छूट
पत्नी को गुजारा भत्ता तभी मिल सकता है जब उसने अपने पति से तलाक लिया हो और दोबारा शादी न की हो। लेकिन अगर पत्नी बिना किसी वाजिब कारण के पति को छोड़कर गई है या किसी और के साथ रह रही है, तो उसे गुजारा भत्ता नहीं मिल सकता।
गुजारा भत्ता देने से इंकार करने पर क्या सज़ा?
अगर कोई पति कोर्ट के आदेश के बावजूद गुजारा भत्ता नहीं देता है, तो उस पर जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
संपत्ति में हिस्सेदारी का अधिकार
तलाकशुदा पत्नी को पति की पैतृक संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मिलता, परंतु पति की स्वयं की अर्जित संपत्ति पर वह अपना दावा कर सकती है।
Take Away Points:
- सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ते के निर्धारण के लिए 8 अहम गाइडलाइंस जारी की हैं।
- गुजारा भत्ते की राशि पत्नी और बच्चों की ज़रूरतों और पति की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जाएगी।
- पति को गुजारा भत्ता देने से इंकार करने पर सज़ा का प्रावधान है।
- तलाकशुदा पत्नी को पति की पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता।

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