कौन से बीजेपी नेता ने कहा की वो मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को लड़ाना चाहती है

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संवाददाता – गौरव जायसवाल

लखनऊ l शनिवार को बीजेपी नेता और योगी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने को सरकार को ही एक बार फिर कटघरे में खड़ा किया। राजभर ने कहा, ‘बीजेपी मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को लड़ाना चाहती है। लेकिन हमें मंदिर-मस्जिद नहीं शिक्षा चाहिए।’ ओम प्रकाश राजभर शनिवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सोलहवें स्थापना दिवस पर रमाबाई आंबेडकर मैदान में आयोजित ‘गुलामी छोड़ो- समाज जोड़ो अति पिछड़ा अति दलित महारैली’ को संबोधित कर रहे थे। रैली स्थल पर पहुंच कर राजभर ने पहले सुहेलदेव की प्रतिमा की पूजा अर्चना की और फिर मंच पर माता-पिता और गुरू को सम्मानित किया।

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राजभर ने कहा, ‘हम सत्ता के लिए बीजेपी के साथ नहीं आए थे। हमने अति पिछड़ों और अति दलितों की हिस्सेदारी और भागीदारी के लिए समझौता किया था, लेकिन बीजेपी हिस्सेदारी नहीं देना चाहती। मैं मन बना कर आया हूं कि आप लोगों की राय के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।’ उन्होंने रैली में अपने समर्थकों से सवाल किया, ‘मेरा मन टूट चुका है… मैं इस्तीफा दे दूं?’ समर्थकों के जोरदार इंकार के बाद राजभर ने कहा, ‘अब संघर्ष कठिन होगा। साथ न छोड़ना। बगावत की तो हमारा झंड़ा पीला है… पीलिया हो जाएगा।’
‘हमें मंदिर नहीं, शिक्षा का मंदिर चाहिए’
राजभर ने कहा, ‘चुनाव आ रहा है। मजबूत पार्टियां कांग्रेस, बीजेपी, एसपी और बीएसपी के नेता फिर आप लोगों के पास आएंगे। आपको रैलियों में ले जाएंगे, लेकिन उनकी नजर में आप लोगों की औकात एक पूड़ी के पैकेट भर की है।’ उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी के लोग आपकी जाति के नेता को भेजेंगे और वह मंदिर बनवाने की बात करेंगे। स्पष्ट कहना कि हमें मंदिर नहीं… शिक्षा का मंदिर चाहिए।
भगवान बीजेपी नेताओं को सद्बुद्धि दें: राजभर
राजभर ने कहा कि देश के 12 राज्यों में पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। यहां भी सीएम घोषणा कर चुके हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव से छह महीने पहले आरक्षण के वर्गीकरण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब मुकर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बीजेपी नेताओं को सद्बुद्धि दें ताकि वह पिछड़ों के बारे में सोंचे। उन्होंने कहा,’हम चाहते हैं कि ऐसी सरकार बने जिसमें हर जाति का बेटा छह-छह महीने के लिए मुख्यमंत्री बने, लेकिन ऐसा न तो बीजेपी की सरकार में होगा और न ही बीएसपी, एसपी और कांग्रेस की सरकारों में। राजभर ने प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का भी मुद्दा उठाया और जनता की राय ली।
‘राम के न हुए, तो तुम्हारे क्या होंगे’
राजभर में कहा, ‘पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राज्य के शिक्षक और कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उन्हें भी लोरी सुना दी। हमने कहा कि यह बीजेपी नेता जब भगवान श्रीराम की नहीं हुए, तो कर्मचारियों के क्या होंगे? खुद हेलिकॉप्टर से चलते हैं, लेकिन भगवान को तिरपाल में बैठा रखा है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं पुरानी पेंशन के मुद्दे पर लड़ता रहूंगा।’

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