गणेश पुराण के अनुसार स्वस्तिक को भगवान श्रीगणेश का स्वरूप माना गया है। इस चिन्ह में प्रत्येक विध्नों और अमंगल का नाश करने के गुण हैं। स्वस्तिक को हिंदू धर्म में ही नहीं अपितु सभी धर्मों में पवित्र माना गया है। पुराणों में स्वस्तिक को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना है। स्वस्तिक का चिन्ह बनाने से घर में धन और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होती है। घर में भिन्न प्रकार से स्वस्तिक बनाने से सुख-शांति, व्यापार में उन्नति और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
घर के बाहर रंगोली या कुमकुम से स्वस्तिक का चिन्ह बनाना मंगलकारी होता है। इससे देवी-देवताओं का घर में आगमन होता है।
व्यापार में उन्नति न होने पर 7 बृहस्पतिवार उत्तर पूर्वी कोने को गंगाजल से धोकर वहां पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर पूजा करें। उसके पश्चात गुड़ का भोग लगाएं अवश्य लाभ की प्राप्ति होगी।
स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर जिस देवी-देवता की प्रतिमा रखी जाती है वह शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
मंदिर में स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर पंच धान्य या दीपक प्रज्वलित कर रखने से कुछ ही समय में इच्छाएं पूर्ण होती है।
इच्छाओं की पूर्ति हेतु मंदिर में गोबर या कुमकुम से उल्टा स्वस्तिक बनाए। जब मनोकामना पूर्ण हो जाए तो वहीं जाकर सीधा स्वस्तिक बनाए।
अनिद्रा और बुरे स्वपनों से छुटकारा पाने हेतु सोने से पूर्व घर के मंदिर में इंडैक्स फिंगर से स्वस्तिक बनाएं।
घर में शुभता, शांति, सुख-समृद्धि और पितरों की कृपा के लिए गोबर से स्वस्तिक बनाएं।
धन लाभ के लिए घर की दहलीज के दोनों ओर स्वस्तिक बनाकर पूजा करें। स्वस्तिक के ऊपर चावल की एक ढेरी बनाएं और एक-एक सुपारी पर कलवा बांधकर उसको ढेरी के ऊपर रखें।
घर में सुख-शांति बनी रहे इसके लिए ईशान अर्थात उत्तर-पूर्व में उत्तर दिशा की दीवार में हल्दी से स्वस्तिक बनाएं।
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