लखनऊ बलरामपुर अस्पताल के आइसीयू में अब मरीजों की जिंदगी बचाना पहले से ज्यादा आसान हो गया है। दरअसल यहां एनएचएम के तहत सात विशेष डॉक्टरों की टीम आइसीयू के लिए तैनात की गई है। जो सीधे गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए मौत से मुकाबला करेंगे। इसमें चार डॉक्टर एनेस्थेटिक व तीन फिजीशियन शामिल होंगे। इससे आइसीयू में डॉक्टरों की किल्लत अब पूरी तरह से दूर हो गई है।
इससे पहले यहां आइसीयू चलाने के लिए लोहिया संस्थान से दो डॉक्टर भेजे गए थे। मगर इतने डॉक्टरों से काम बेहतर तरीके से नहीं चल पा रहा था। मरीजों की संख्या के मुकाबले डॉक्टर की संख्या पर्याप्त नहीं थी। यहां 40 बेड का आइसीयू है, जिसमें से 12 बेड सिर्फ कार्डियोलॉजी आइसीयू के लिए है। मगर अब एनएचएम के तहत एक साथ सात डॉक्टरों की टीम आइसीयू के लिए विशेष तौर पर मिल गई है। इससे अब आइसीयू में स्ट्रेंथ की कमी नहीं रह जाएगी।
फलस्वरूप आइसीयू में भर्ती मरीजों की नियमित देखभाल के लिए अब हमेशा एक-दो डॉक्टर मौजूद रहा करेंगे। जिससे मरीज को किसी भी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल वह उनके पास पहुंच जाएंगे।अब आइसीयू में भर्ती मरीजों की निगरानी बेहतर तरीके से हो पाएगी। ऐसे में आसानी से मौत किसी भी मरीज की जिंदगी नहीं छीन सकेगी। जबकि पहले कई बार ऐसा भी होता था कि आइसीयू में भर्ती मरीज की तबीयत गंभीर होने पर खुद तीमारदार डॉक्टर को ढूंढ़ते फिरा करते थे, लेकिन समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाते थे।
ऐसे में तीमारदारों की ओर से अस्पताल पर लापरवाही का आरोप भी मढ़ा जाता था। मरीजों की उत्तम देखभाल के लिए आइसीयू में 12 वेंटिलेटर भी लगाए गए हैं।
क्या कहते हैं बलरामपुर अस्पताल निदेशक?
बलरामपुर अस्पताल निदेशक डॉ राजीव लोचन के मुताबिक, अब हमारे पास आइसीयू में सात विषेश डॉक्टरों की टीम है। इससे गंभीर मरीजों की देखभाल व निगरानी करना पहले से अधिक आसान हो गया है। पहले सिर्फ दो ही डॉक्टर थे। कई बार ओपीडी के डॉक्टरों की ड्यूटी लगानी पड़ जाती थी। इससे मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।
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