नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे ने निर्भया मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करने के दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई है। दोषियों ने मामले पर समीक्षा याचिका दायर की है। प्रधान न्यायाधीश ने अपने भतीजे अर्जुन बोबडे के पीडि़ता की ओर से उपस्थित होने के चलते मामले से खुद को अलग कर लिया है।
मामले की समीक्षा याचिका पर सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश बुधवार को एक पीठ का गठन करेंगे। आज अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई शुरू होने के दस मिनट के भीतर ही टल गई। बोबडे के हटने के बाद अब तीन जजों की नई बेंच बुधवार सुबह साढ़े दस बजे इस पर सुनवाई करेगी। माना जा रहा है कि दो जज तो यही रहेंगे, जबकि सीजेआई की जगह कोई अन्य जज आएंगे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तिहाड़ जेल प्रशासन चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारियों में जुटा है। एक साथ चारों को फांसी देने के लिए एक नई तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है। इसके पीछे यह वजह बताई जा रही है कि यदि चारों में से एक को भी बेचैनी के चलते समस्या हो जाती है या फिर वह बीमार हो जाता है तो फांसी टालनी होगी।
फिलहाल दोषियों की सजा कुछ दिन और टल सकती है। अगर सुप्रीम कोर्ट से अक्षय की रिव्यू पिटिशन खारिज होती है तो उसके बाद भी दोषियों के पास कुछ समय रहेगा। फांसी से पहले डेथ वारंट निकालना अनिवार्य होता है। जेल प्रशासन सजायफ्ता कैदियों को फांसी के लिए मानसिक रूप से तैयार होने को 14 दिन देता है।
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