हिंदू मुस्लिम आस्था का प्रतीक बुडन शाह पीर सबुरन बाबा के मजार पर उर्स मेला में जायरीनों ने की चादरपोशी

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उपेंद्र कुशवाहा

पडरौना,कुशीनगर : जिले के पडरौना तहसील क्षेत्र के जंगल शाहपुर गांव के निकट वुडन शाह पीर यानी सबुरन बाबा के दरगाह पर उर्स मेला दो सप्ताह पहले ही से शुरू हो गया था। यूपी बिहार नेपाल के अलावे कोने-कोने से आये जायरीन बाबा की मजार पर अपने श्रद्धा के फूल न्योछावर कर रहे थे। जायरीनों के आने का सिलसिला उर्स शुरू होने से लेकर पूरे एक महीने तक जारी रहेगा। समय के साथ-साथ अकीदतमंदों की भीड़ भी बढ़ती जाएगी। शाम होते-होते बड़ी दरगाह की हर गलियां जायरीनों की भीड़ से खचाखच भर गई थीं। मेला क्षेत्र में तो पैर धरने की जगह बड़ी मुश्किल से मिल पा रही थी।

युपी,बिहार के अलावा कई राज्यों से आते है जायरीन

:- उत्तर प्रदेश,बिहार,नेपाल व अन्य राज्यों के जायरीन पहुंच चुके हैं। कोई बस या अपने निजी वाहन से तो कोई अपनी बडी वाहनों से यहां पहुंचे हैं। अधिकांश अकीदतमंदों का मानना है कि यहां मैं खुद नहीं आया,बल्कि बाबा का बुलाया आया है। हर किसी के नसीब में यहां की जियारत नहीं होती। किसी अच्छे कामों के नतीजे में यहां आने का मौका मिला है।

मेले में सजी है सैकड़ों दुकानें

:- जंगल शाहपुर गांव के निकट वुडन शाहपुर पीर यानी सबुरन बाबा बाबा के दरगाह पर उर्स में लगे मेले क्षेत्र में तरह-तरह की दुकानें सज गयी हैं। कोई मिठाई बेच रहा था तो कोई फूल से सजी चादरें। बहुत सारे दुकानदार दूसरे राज्यों के प्रसिद्ध सामान भी मेले में उतारे हैं। सभी दुकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटनी शुरू है। हर कोई अपनी पसंद के सामान खरीदने में जुटे हैं। हालांकि मेले में आए जायरिनों के साथ युवा बच्चे विभिन्न झूले का भी आनंद लेते नजर आए,इतना ही नहीं इन सबके अलावा इस मेले में सबसे बड़ी खासियत यह रही की मौत की कुआं का आनंद लेने के लिए भारी भीड़ रही ।

महिलाओं के साथ बच्चों होती है अधिक भीड़

:- बाबा की मजार पर दूर-दूर से आए जायरीनों में मर्द से अधिक महिलाओं की संख्या रहता है। कहीं बच्चों का हाथ थामे महिलाएं फूल की चादर खरीद रहीं हैं तो कोई बच्चों की जिद्द के आगे मजबूर होकर उन्हें मिठाई दिलाती नजर आयीं। तो कहीं कोई महिला नकाब में तो कोई चादर से चेहरे ढंके बाबा की मजार पर चादरपोशी करतीं दिखीं।

बाबा के दर पर आने से बन जाते हैं बिगड़े काम

मान्यता है कि यहां आने वाले अधिकांश लोगों के बिगड़े काम बन जाते हैं। यहां जो भी दुआ मांगी जाती है,वह पूरी होती हैं। बाबा की मजार हिन्दू-मुस्लिम की मिशाल स्थापित है। गंगा जमुनी संस्कृती का असल रूप में है

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