381 करोड़ की साइबर ठगी से पूर्व आईजी कैसे बचे?

381 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से पूर्व आईजी बचे!

क्या आप जानते हैं कि एक पूर्व आईजी को 381 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की गई? यह सच है! प्रयागराज में रहने वाले पूर्व आईजी डीके पांडा, जिन्हें ‘दूसरी राधा’ के नाम से भी जाना जाता है, इस भयानक साइबर हमले से बाल-बाल बच गए. यह घटना सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे! आइए, इस हैरान कर देने वाले मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं.

साइप्रस से आया 381 करोड़ का झांसा

यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब डीके पांडा को एक व्हाट्सएप्प कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को अरव शर्मा बताया और दावा किया कि पांडा ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में 381 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है! सोचिए, 381 करोड़ रुपये! ये पैसा कथित तौर पर साइप्रस सिटी के साइप्रस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन से जुड़ा था, जो पूरे यूरोपीय संघ में व्यापार करता है. कॉलर ने यह भी बताया कि लंदन के वित्त विभाग में काम करने वाले राहुल गुप्ता और फिनिक्स ग्रुप के विनीत गोयल ने इस ट्रेडिंग में मदद की है.

कैसे काम करता है ये साइबर ठगी का खेल?

ऐसे ठगों का तरीका बेहद ही चालाक होता है. वे पहले लोगों को बड़े-बड़े मुनाफे का झांसा देकर आकर्षित करते हैं. इसके बाद, वे पैसे निकालने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते हैं. इस मामले में भी, ठगों ने पांडा से 8 लाख रुपये जमा करने की मांग की. यदि पांडा यह राशि जमा नहीं करते, तो उन्हें गंभीर परिणामों की धमकी दी गई.

पूर्व आईजी की सतर्कता बची भारी

लेकिन, पांडा जी चालाकी से इस ठगी के जाल में नहीं फंसे. उन्होंने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई. 26 अक्टूबर 2024 को दोपहर 3:25 बजे आई इस कॉल के बाद उनकी तत्परता ने उन्हें इस बड़े नुकसान से बचा लिया. पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है.

सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार

इस घटना से हमें एक महत्वपूर्ण सबक मिलता है: साइबर ठगों से सावधान रहना बेहद जरूरी है. ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें. अपने बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी कभी भी किसी अजनबी के साथ साझा न करें.

साइबर ठगी से बचाव के उपाय

साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ जरूरी उपाय इस प्रकार हैं:

  • अज्ञात नंबरों पर सावधानी: अगर कोई अज्ञात नंबर आपको धन कमाने का झांसा दे रहा है, तो उससे सावधान रहें।
  • ऑनलाइन लेनदेन: ऑनलाइन लेनदेन करते समय, केवल सुरक्षित वेबसाइटों का उपयोग करें और हमेशा SSL प्रोटोकॉल जांच लें।
  • अपनी जानकारी: अपने व्यक्तिगत और वित्तीय विवरण की जानकारी किसी के साथ भी साझा न करें, खासकर ऑनलाइन।
  • अपडेटेड सॉफ्टवेयर: अपने कंप्यूटर और स्मार्टफोन में हमेशा सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें।
  • सुरक्षा सॉफ्टवेयर: अपने उपकरणों में हमेशा सुरक्षा सॉफ्टवेयर उपयोग करें।
  • सुरक्षित पासवर्ड: हमेशा मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड उपयोग करें।
  • दो-कारक प्रमाणीकरण: जहां तक संभव हो, दो-कारक प्रमाणीकरण को सक्षम करें।

Take Away Points

  • साइबर अपराध एक गंभीर खतरा है, और हम सभी को इससे सचेत रहना होगा।
  • संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत ध्यान दें और आवश्यक कार्रवाई करें।
  • हमेशा सुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों का पालन करें।
  • प्रौद्योगिकी और अपराधों के बारे में जागरूकता फैलाएं।

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