आधार के जरिए पति से मिली पत्नी

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नई दिल्ली : अपने आप से अनजान एक गुम महिला को उसके परिवार के पास पहुंचाना किसी चुनौती से कम न था। मगर, दिल्ली पुलिस की कोशिशों और आधार से कामयाबी मिली। महज एक महीने के भीतर मानसिक रूप से विक्षिप्त इस महिला के परिवारवालों का पता मिल गया। मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा ने आदेश दिया कि आशा किरण में औपचारिकताएं पूरी कर लेने के बाद इस महिला को उसके पति को सौंप दिया जाए। पति को निर्देश दिया गया कि वह अपनी बीमार पत्नी का जरूरी इलाज जारी रखे। पुलिस के मुताबिक, उन्हें 22 फरवरी को फोन पर सूचना मिली थी कि एक मानसिक रूप से बीमार महिला शास्त्री पार्क के पास यमुना किनारे भटक रही है। कश्मीरी गेट थाने की पुलिस मौके पर पहुंची।

उसने वहां से महिला को रेस्क्यू कराकर कोर्ट में पेश किया, जहां से सुनीता को आशा किरण भिजवा दिया गया। महिला की मानसिक अस्वस्थता के चलते उससे उसके और उसके परिवारवालों के बारे मे जानना संभव नहीं था। पुलिस ने महिला का आधार कार्ड बनवाने का फैसला लिया जिससे यह पता चल सके कि कहीं आधार कार्ड डेटा बेस में उसका परिचय पहले से मौजूद तो नहीं। प्रक्रिया के दौरान पता चला कि इस महिला का पहले से आधार कार्ड बना हुआ है। इसके बाद पुलिस ने यूआईडीएआई से महिला का डेटा निकलवाकर उसके परिवार वालों का पता लगाया।

राजस्थान के माला खेड़ा पुलिस थाने में 30 नवंबर 2017 को महिला के गुम होने की कंप्लेंट दर्ज करवाई गई थी। कश्मीरी गेट थाने की पुलिस ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर कर यह सारी जानकारी दी और बताया कि महिला का पति राजेंद्र उसे अपने साथ वापस ले जाना चाहता है और उन्होंने उसकी पहचान को वेरिफाई कर लिया है। एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला को उसके परिवार से मिलाने के लिए संबंधित थाने के एसएचओ देवेंद्र सिंह और सब इंस्पेक्टर सतेंद्र सिंह की कोशिशों की कोर्ट ने तारीफ की। डीसीपी से कहा कि वह इन दोनों अधिकारियों की अपने स्तर पर भी हौसलाअफजाई करें।

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