मां के गुनाह की सजा आखिर बेटे को क्यों?

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शबनम ने अपने ही मां-बाप, भतीजे, दो भाई, एक भाभी और रिश्ते की बहन को दूध में नशीला पदार्थ देकर, रात को बेहोशी की हालत में, एक-एक करके कुल्हाड़ी से मार दिया था। बताया जाता है कि शबनम के घर में ही अगल-बगल सात कब्रें बनी हुई हैं और दीवालों पर खून के दाग आज भी मौजूद हैं।

उस रात की सुबह बहुत भयानक थी। जब गांव वाले उठे तो उन्होने देखा कि शबनम जोर-जोर से बिलख रही थी। जिसे भी जानकारी हुई वो उससे सहानुभूति जता रही थी क्योंकि उसके पिता, माँ, बड़ा भाई, छोटा भाई, भाभी, कजिन और बड़े भाई का 10 महीने का बेटा सब मारे गए थे। लोग उस लड़की से सहानुभूति जता रहे थे जिसने अपने पूरे परिवार को खो दिया था। इसके बाद पुलिस ने कार्यवाही शुरू की। पुलिस ने पूछतांछ की तो बताया कि लुटेरे छत के रास्ते से घर में घुसे और उसके परिवार के लोगों की निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी। एक बुज़ुर्ग पड़ोसी ने बताया कि जब उसने उस लड़की के चिल्लाने की आवाज सुनी, तब उन्हें लगा कि उसके घर में डकैती हो गई है। शबनम रो रही थी और पूरा गांव उसके साथ सहानुभूति जता रहा था। 15 अप्रैल को इस केस की जांच एसएचओ आरपी गुप्ता को सौंप दी गई। उन्होने शबनम के घर पर पहुंच कर हत्या वाली जगह की जांच करना शुरू किया तो उन्हे घर से नशीली दवाइयों की गोलियां मिली। उधर लाशों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आ गई कि इन लोगों को सोने से पहले कोई ड्रग दी गई थी जिसके चलते सभी गहरी बेहोशी में चले गए। अब पुलिस के सामने ये सवाल खड़ा हुआ कि अगर सभी बेहोश हो गए तो वह लड़की कैसे होश में बनी रही। वह क्यों नही बेहोश हुई। शबनम ने डकैती की बात की थी लेकिन पुलिस को ऐसा कोई भी निशान नही मिला जिससे यह साबित होता हो कि उस घर में डकैत घुसे थे। जमीन से घर के दीवालों की ऊंचाई 14 फुट थी और सीढ़ी लगाने का कोई निशान भी नही मिला। अब पुलिस को शक हो गया कि यह काम किसी बाहर वाले का नही बल्कि घर के अंदरवाले का ही है। इसके बाद पुलिस ने शबनम का मोबाइल खंगाला तो पता चला कि घटना वाले दिन शबनम के मोबाइल से किसी एक व्यक्ति को एक ही दिन में 50 बार से ज्यादा काल की गई थी। इसके बाद इस कांड की परतें खुलना शुरू हुईं तो लोगों के कदमों तले जमीन खिसक गई।

शबनम जिस आदमी को फोन कर रही थी उसका नाम सलीम था। सलीम पांचवी तक पढ़ा था और मजदूरी करता था जबकि शबनम डबल एमए थी। उसने भूगोल और अंग्रेजी दोनो में एमए किया था।

घर वाले सलीम और शबनम के रिश्ते से खुश नही थे क्योंकि दोनों अलग-अलग बिरादरी से आते थे और दोनों के स्टेटस में भी जमीन आसमान का अंतर था। शबनम ने अपने परिवार वालों को सोने से पहले खाने में नशीली गोलियां मिला कर खिला दीं जिससे सभी घर वाले बेहोश हो गए। इसके बाद सलीम वहां आ पहुंचा। शबनम ने बहोश हो चुके घर वालों के बाल पकड़े और सलीम ने एक-एक करके सबका गला काट दिया। हैवानियत की इंतेहा यह थी कि इन लोगों ने 10 महीने के बच्चे को भी नही छोड़ा।

पुलिस ने शबनम और सलीम दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल जाते समय शबनम दो महीने की गर्भवती थी। यह बच्चा सलीम का था।

बुलंदशहर के सुशील विहार कालोनी में रहने वाले उस्मान सैफी का परिवर इस बच्चे की परवरिश कर रहा है। इस बच्चे का नाम ताज है। ताज को अपनी मां के गुनाहों का एहसास है। बताया जाता है कि शबनम हमेशा जेल से बेटे को खत लिखा करती है। इस साल 21 जनवरी को शबनम अपने बेटे से मिली। तब शबनम ने अपने बेटे को प्यार करते हुए टाफी और कुछ रूपये दिए। शबनम ने अपने बेटे को पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनने की सीख दी। वह बार-बार अपने बेटे को चूमती और बोलती कि मैं बुरी मां हूं मुझे कभी याद न करना।

ताज की परवरिश करने वाले उस्मान और शबनम एक ही कालेज में पढ़ते थे और शबनम उस्मान से दो साल सीनियर थीं। उस्मान ने जेल में बंद शबनम के बच्चे को गोद लेने के लिए बहुत कोशिशें कीं। पहले तो शबनम ने लगातार इंकार किया लेकिन बाद में बच्चे की बेहतर परवरिश की गारंटी पर मान गईं।

जब राष्ट्रपति ने शबनम की दया याचिका खारिज कर दी तो शबनम के बेटे ने राष्ट्रपति को चिठ्ठी लिखकर उसकी मां को माफ करने की गुजारिश की है।
शबनम और सलीम के केस में 100 तारीखों तक बहस हुई थी। इसमें 29 गवाहों ने शबनम सलीम के खिलाफ गवाही दी। 27 महीने तक चली सुनवाई के बाद 14 जुलाई 2010 के दिन शबनम और सलीम दोषी करार दिए गए। 15 जुलाई 2010 को दोनों को सुनाई फांसी की सजा गई। इस केस में गवाहों से 649 सवाल किये गये और 160 पेज में सजा सुनाई गयी। शबनम सलीम के केस की सुनवाई तीन जिला जजों के कार्यकाल में पूरी हुई। कहा जाता है कि जिला जज एसएए हुसैनी ने 29 सेंकेड में फांसी की सजा सुनाई थी।

शबनम ने गुनाह किया जिसकी सजा उसे मिलने जा रही है लेकिन उसके मासूम बेटे के सिर से मां का साया छीन कर उसके किस गुनाह की सजा दी जाएगी।

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