जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र भी यहां आ चुके हैं,इतना ही नहीं यहां के पूर्व सांसद बालेश्वर यादव के अलावे कांग्रेस पार्टी के पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह भी हाल-चाल पूछ चुके हैं | इन सबके बीच मुसहर बस्ती में आने-जाने वाले नेताओं का सिलसिला जारी है। लेकिन इस मुसहर बस्ती में नेताओं के लगने वाले जमावड़े के बीच यहां से नुमाइंदगी करने वाले सदर विधायक व सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य दोनों मुसहर के मौत होने के एक सप्ताह बीतने के बाद भी नहीं आ सके हैं ।
मजे की बात यह है कि दो मुसहरों की मौत के एक हफ्ते बीतने बाद भी मंत्री श्री मौर्य न तो स्वय पडरौना आना मुनासिब समझ रहे हैं और न ही खुद चलकर मुसहरों के बीच पीड़ित परिजनों को ढांढंस बंधाने की कोशिश कर है । बहरहाल इन सबके बीच मंत्री जी अपने पीआरओ को ही इस मुसहर बस्ती में भेजकर कुशल क्षेम पूछ लेना लखनउ में बैठ कर इन परिवारों का दुख दर्द को समझ लिया है | पडरौना के विधायक व सूबे की सरकार के काबीना मंत्री का मुसहर बस्ती में हफ्ते बीतने के बाद भी न आना लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में सरकार के मंत्री व यहां के विधायक श्री मौर्य को लेकर लोगों में चर्चा यह है कि वह तो अपने भाषणों में यह कहते नहीं थकते थे कि पडरौना उनकी कर्मभूमि है और यहां के लोगों का सुख-दुख उनका ही है।
गौरतलब हो कि पडरौना नगर से चंद दूरी पर स्थित यह गांव खिरकिया,जहां बीते शुक्रवार को दो मुसहर युवक असमय काल के गाल में समा गए थे। दोनों सगे भाई थे। दोनों भाईयों की मौत भूख से होने की बात जब सामने आई तो जनपद ही नहीं सूबे की सियासत भी गरमा गई थी। सपा, बसपा व कांग्रेस ने इसे योगी सरकार की जन विरोधी नीतियों का नतीजा करार दिया तो,वहीं सत्ताधारी दल भाजपा मामले की लीपापोती में लगी रही। प्रशासन भी कुछ यही राग अलापता नजर आया था।
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