लखनऊ में महाघोटाला: गरीबों का 20 करोड़ का अनाज खा गये कोटेदार और सरकारी कर्मचारी, पढ़े पूरी रिपोर्ट

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लखनऊ । घोटालेबाजों ने 43 से ज्यादा जिलों में सिर्फ चार माह में 20 करोड़ का अनाज घोटाला कर डाला है। सरकारी अनाज का फर्जी वितरण दिखाने के आरोप में एसटीएफ ने रविवार को पहली बड़ी कार्रवाई की। एसटीएफ ने वजीरगंज के कोटेदार मोहम्मद आमिर खान, उसके भाई कम्प्यूटर ऑपरेटर अल्तमश और नोएडा निवासी पुष्पेंद्र पाल को गिरफ्तार कर दावा किया है कि इसी तरह अन्य जिलों में भी जल्द गिरफ्तारियां होंगी। एसटीएफ का मानना है कि इसमें खाद्य विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। मामले में साइबर थाने में भी धोखाधड़ी व आईटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। एसटीएफ ने देर रात लखनऊ से ही तीन और लोगों को हिरासत में ले लिया।

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एसटीएफ ने वजीरगंज के कोटेदार मोहम्मद आमिर खान, उसके भाई कम्प्यूटर ऑपरेटर अल्तमश और नोएडा निवासी पुष्पेंद्र पाल को गिरफ्तार कर दावा किया है

अमिताभ यश आईजी एसटीएफ ने बताया कि आमिर और अल्तमश ने पूछताछ में बताया कि जुलाई में उन्होंने अपनी ही दुकान में 100 कार्डों पर अनाज निकाला। इसके अलावा कोटेदार धर्मेंद्र सिंह, योगेश द्विवेदी, राजकुमारी, रामचंद्र चैधरी, शंकर प्रसाद, शिव प्रकाश, संतोष रावत, सीमा गुप्ता, मेसर्स महिला उप समिति के 1000 से ज्यादा कार्डों पर आमिर ने अपने आधार का इस्तेमाल कर जुलाई में अनाज वितरण दिखाया। अल्तमश ने कोटेदार संपत लाल और रामकली की ई-पॉस मशीन पर 200 से ज्यादा राशन कार्डों पर अनाज चोरी की। इन सभी कोटेदारों के पास उनके सप्लाई इंस्पेक्टरों व ऑपरेटर की लॉगइन आईडी व पासवर्ड रहता था। इसकी वजह से घोटालेबाजों का काम बहुत आसान हो गया था।

अमिताभ यश ने कहा कि लाभार्थियों के डेटा को आधार से कनेक्ट करने की जल्दबाजी और सॉफ्टवेयर की कमी से करोड़ों की चपत लग गई। उन्होंने यूआईडीएआई के सिस्टम में किसी कमी या सेंध की आशंका से इनकार किया है। आईजी एसटीएफ ने बताया कि नोएडा निवासी पुष्पेंद्र पाल, वहां राशनिंग अफसर के चालक सोनू उर्फ राम कुमार के जरिए जितेंद्र उर्फ जित्ते गुप्ता से मिला। जित्ते ने उसका संपर्क लखनऊ के कोटेदारों से करवाया। वह 15 दिन लखनऊ और 15 दिन नोएडा में रहकर यही काम करता था।

बता दें कि प्रदेश के 43 जिलों में आधार नम्बरों में हेराफेरी कर हुए करोड़ों के अनाज घोटाले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। इस बाबत डीजीपी का पत्र मिलने के बाद एसटीएफ ने खाद्य आयुक्त से जांच से जुड़ा ब्योरा मांगा गया था। खाद्य आयुक्त आलोक कुमार ने आधार नम्बरों में हेराफेरी की शिकायत मिलने पर जांच के आदेश दघ्एि थे। जांच में खुलासा हुआ कि जालसाजों ने अनाज वितरण में पारदर्शिता के लिए बनाए गए ऑनलाइन सिस्टम में ही सेंध लगा दी है। कोटेदारों ने कम्प्यूटर विशेषज्ञों की मदद से लाभार्थियों के आधार नम्बर को संशोधित कर अपने परिचितों के आधार नम्बर को फीड कर दिया। फिर उनके जरिए गरीबों का अनाज निकाल लिया गया।

अनाज लेने के बाद असली लाभार्थी के आधार नम्बर को फिर से फीड कर दिया गया। इस जालसाजी के जरिए बड़ा अनाज घोटाला किया गया। इस मामले में खाद्य आयुक्त के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गईं। वहीं, खाद्य एवं रसद विभाग ने एसटीएफ की जांच में सूचनाओं को देने और समन्वय स्थापित करने के लिए अपर आयुक्त खाद्य अनूप शंकर को नोडल अधिकारी नामित किया है।

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