आगरा, आगरा सेंट्रल जेल में बंदियों के द्वारा बनाया गया फर्नीचर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अदालतों की शान बढ़़ा रहा है। कभी हथियार उठाकर दूसरों का खून बहाने और अपराध को उद्योग मानने वाले बंदियों ने जेल की चहारदीवारी में रहने के दौरान लकड़ी को तराशा तो उसे फर्नीचर की शक्ल दे दी। जेल के अंदर फर्नीचर उद्योग खड़ा कर दिया। जिन हाथों को हथियार उठाने के लिए जाना जाता था। वही हाथ अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से ज्यादा जिलों की अदालतों में अपने हुनर से पहचान बना चुके हैं। बंदियों द्वारा चलाए जा रहे फर्नीचर उद्योग से केंद्रीय कारागार ने करीब दो साल के दौरान डेढ़ करोड़ रुपये का फर्नीचर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न अदालतों को सप्लाई किया जा चुका है।
केंद्रीय कारागार में इस समय दो दर्जन से ज्यादा बंदी फर्नीचर उद्योग से जुड़े हैं। जेल प्रशासन ने बंदियों के पुर्नवास की योजना के तहत फर्नीचर उद्योग शुरू किया था। इसका मकसद बंदियों के सजा काटकर बाहर निकलने के बाद उन्हें पुर्नस्थापित करना है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते जब सारे उद्योग मंदी की मार से जूझ रहे हैं। जून में अनलाक होने के बाद अक्टूबर के दौरान सेंट्रल जेल के बंदियों को 53 लाख रुपये से ज्यादा का फर्नीचर बनाने का आर्डर मिला। उन्होंने इसे बनाकर झांसी, ललितपुर, गौतमबुद्ध नगर, हाथरस की अदालतों को भेजा। वहीं वर्ष 2019 में फर्नीचर उद्योग को एक करोड़ रुपये से ज्यादा के आर्डर मिले थे। उन्होंने इतनी बड़े आर्डर को निर्धारित समय में तैयार करके संबंधित जिलों की अदालतों को भेजा था।
हुनरमंद बंदियों की कमाई का साधन
फर्नीचर उद्योग से जुड़े हुनरमंद बंदियों को 40 रुपये रोज मजदूरी मिलती है। वहीं अर्ध कुशल कारीगर को 30 और अकुशल कारीगर को 25 रुपये मजदूरी मिलती है। फर्नीचर उद्योग से इस समय दो दर्जन से ज्यादा बंदी जुड़े हुए हैं।
बंदियों द्वारा बनाया जाने वाला फर्नीचर
कुर्सी, मेज, गर्वनर कुर्सी, स्टील बुक रैक, आफिस टेबल, आफिस स्टील अलमारी, कंप्यूटर टेबल, स्टील फ्रेम स्टूल, हाफ बैक कुर्सी, फुल बैक कुर्सी, सेंटर टेबल आदि बनाई जाती है।
केंद्रीय कारागार में बंदियों द्वारा तैयार किया गया फर्नीचर अपनी मजबूती के लिए पहचाना जाता है। आर्डर मिलने पर बंदियों द्वारा कुर्सी, मेज, अलमारी आदि तैयार की जाती हैं। ये फर्नीचर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अदालतों में सप्लाई किया जाता है।
वीके सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार
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