बालाजी की न्यायिक हिरासत 12 जुलाई तक बढ़ाई गई

डेस्क रिपोर्ट :

तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य मंत्री वी सेंथिल बालाजी के बर्खास्तगी आदेश को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया है और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को इसके बारे में सूचित किया है। देर शाम मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में राज्यपाल ने कहा कि वह इसे बारे में अटार्नी जनरल से कानूनी राय लेंगे।सूत्रों ने बताया कि बालाजी को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करने के आदेश को राज्यपाल ने अगले आदेश तक स्थगित रखा है। इससे पहले नौकरी के बदले नकदी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद राज्यपाल ने ही बालाजी को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया था।मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा था कि राज्य सरकार राज्यपाल के फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देगी। राज्यपाल के पास किसी मंत्री को कैबिनेट से बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है। मामला तूल पकड़ने पर राज्यपाल ने बर्खास्तगी के आदेश को फिलहाल टाल दिया है।

इस मामले में राजनीतिक विश्लेषक दुरई करुणा ने कहा कि मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल करना या हटाना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब चार-पांच दशकों में मैंने किसी राज्यपाल को मुख्यमंत्री की सिफारिश के बिना किसी मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाने का मामला देखा या सुना नहीं है गौरतलब है कि 47 वर्षीय बालाजी की 14 जून को गिरफ्तारी के बाद सरकार ने उन्हें मंत्रिमंडल में बरकरार रखा। हालांकि, उनके पास कोई विभाग नहीं है और उनके विभागों को वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु (बिजली) तथा आवासीय मंत्री मुथुसामी (आबकारी) को सौंप दिया गया।इस मुद्दे पर तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने कहा कि द्रमुक नेता सेंथिल बालाजी को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करके राज्यपाल आरएन रवि ने नैतिक रूप से सही निर्णय लिया है। राज्यपाल को बर्खास्त करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि वह मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। उन्होंने कारण बताया है कि उन्होंने सेंथिल बालाजी को क्यों बर्खास्त किया।

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