जानिये आयकर विभाग के ‘झूठे मुखबिर’ बने 30 हजार दामाद

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कानपुर। जिस आयकर विभाग के पास सरकार का राजस्व बढ़ाने का अहम जिम्मा है, उस पर पारिवारिक विवाद के फिजूल मामलों का भी अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। वधू पक्ष अगर पुलिस से मोटे दहेज की शिकायत कर रहा है तो टैक्स चोरी में ससुर की गर्दन फंसाने को दामाद आयकर विभाग के ‘झूठे मुखबिर’ बन रहे हैं। दहेज संबंधी ऐसी शिकायतों की तीस हजार फाइलें खंगालने में आयकर अधिकारियों को सिर खपाना पड़ रहा है। आयकर विभाग के निदेशक जांच के दफ्तर का दृश्य ही इन दिनों बदला हुआ है।

जिस ऑफिस में छापे के दौरान मिले कागजातों की फाइलों की जांच होनी चाहिए, वहां अधिकारी यह गुणा-भाग लगाने को मजबूर हैं कि वधू पक्ष ने दहेज में कितनी नकदी दी और कितने जेवर दिए। साथ ही वर पक्ष की तरफ से वधू पक्ष पर क्या आरोप लगाए गए हैं। खुद अधिकारी भी परेशान हैं लेकिन, प्रधानमंत्री कार्यालय से शिकायतें आने की वजह से हर फाइल की जांच कर रिपोर्ट लगाना उनकी मजबूरी है।

यह है शिकायतों के पीछे की कहानी :

विवाह के बाद पति-पत्नी में हुए झगड़े की वजह से कई मामले थाने तक पहुंच जाते हैं। वधू पक्ष के लोग वर पक्ष को फंसाने के चक्कर में भारी मात्र में जेवर और नकदी देने की बात रिपोर्ट में लिखाते हैं। साथ ही और दहेज मांगने की बात भी लिखी जाती है। इसमें कई शिकायतें तो 25 से 30 लाख रुपये का दहेज देने तक की हैं। ऐसे में वर पक्ष आयकर विभाग को शिकायत दे रहा है, ताकि वधू पक्ष भी दबाव में आए और उनके खिलाफ लिखाई गई रिपोर्ट वापस ले ले। इन शिकायतों में एफआइआर की कॉपी लगाई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा कि जिस वित्तीय वर्ष में इतना दहेज दिया गया, उस वर्ष आयकर रिटर्न में इसका जिक्र किया गया क्या? हालांकि तमाम शिकायतों में दामाद ससुराल की तमाम संपत्तियां भी गिना रहे हैं।

हर शिकायत की जांच कर भेजी जा रही रिपोर्ट :

पीएमओ से सभी फाइलें जांच के लिए आयकर कार्यालय भेजी जा रही हैं, ताकि संपत्तियों की जांच करा ली जाए। हर शिकायत के लिए जांच अधिकारी तैनात होते हैं। जांच में बुलाए गए वधू के परिजन में ज्यादातर कह रहे हैं कि दामाद पर दबाव बनाने के लिए ज्यादा दहेज लेने की बात लिखी। सभी तथ्यों को शामिल कर जांच रिपोर्ट पीएमओ भेज दी जाती है।

वैवाहिक विज्ञापनों पर भी शिकायत :

आयकर विभाग के पास दहेज के अलावा वैवाहिक विज्ञापन में बताए गए वेतन पर रिटर्न दाखिल न करने की भी शिकायत की जा रही है। किसी के मकान खरीदने पर भी शिकायत की जा रही है। ऐसी करीब 70 हजार शिकायतें विभाग के पास आई हैं।‘

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