सप्लाई चेन सुरक्षा: नई चुनौतियाँ, नए समाधान

सप्लाई चेन सुरक्षा: एक नया युग

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। कोविड-19 महामारी ने कुशलता (जस्ट इन टाइम) पर ध्यान केंद्रित करके लचीलापन (जस्ट इन केस) की ओर ध्यान आकर्षित किया, लेकिन सितंबर 2024 में दो घटनाक्रमों ने संकेत दिया कि आपूर्ति श्रृंखलाओं की कल्पना और संचालन के तरीके में एक और बदलाव हो रहा है – इस बार सुरक्षा (जस्ट टू बी सिक्योर) की ओर। यह बदलाव केवल कुशलता और लचीलेपन से परे जाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सुरक्षा का प्रभाव

अमेरिका का कड़ा रुख

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सितंबर 2024 में कुछ कनेक्टेड वाहन प्रणालियों के आयात या बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के नियमों का प्रस्ताव रखा, जो चीन या रूस से जुड़े हैं। यह कदम केवल व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा से परे जाकर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी में मौजूद हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को संभावित जासूसी उपकरणों के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अमेरिका चिंतित है। इस तरह की तकनीक को विरोधियों के हाथों में जाने से होने वाले नुकसान की आशंका इस प्रतिबंध के पीछे का मुख्य कारण है।

इजरायली हमला: एक जगा देने वाली घटना

इजरायल में सितंबर 2024 में हुए सप्लाई चेन हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी। यह हमला लेबनान में हिजबुल्लाह द्वारा उपयोग किए जाने वाले पेजर और वॉकी-टॉकी पर हुआ, जिससे कई लोग मारे गए और हज़ारों घायल हुए। यह घटना दर्शाती है कि कितनी ही प्राचीन तकनीक वाले उपकरणों का भी दुरुपयोग कर सुरक्षा को भारी खतरा पहुँचाया जा सकता है। इस घटना ने सभी उद्योगों में इस्तेमाल की जा रही उन्नत तकनीकों के बारे में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा के प्रति नए दृष्टिकोण

‘जस्ट इन टाइम’ से ‘जस्ट टू बी सिक्योर’ की ओर

1980 और 2010 के दशक के दौरान, वैश्विकरण के चरम पर, आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिकतम दक्षता के लिए कॉन्फ़िगर किया गया था। “जस्ट इन टाइम” दृष्टिकोण ने लागत और अन्य कारकों के आधार पर दुनिया भर के विभिन्न स्थानों से घटकों की खरीद और संयोजन किया। लेकिन यूएस-चीन प्रतिद्वंद्विता, तकनीकी पृथक्करण और कोविड-19 महामारी ने इस दृष्टिकोण को चुनौती दी है। “जस्ट इन केस” दृष्टिकोण ने लचीलापन पर जोर दिया, लेकिन अब “जस्ट टू बी सिक्योर” दृष्टिकोण ने सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण बना दिया है।

‘ट्रस्ट बट वेरीफाई’ और ‘ज़ीरो ट्रस्ट’ मॉडल

भारत जैसे देशों के लिए जरूरी है कि वे अपने आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक रणनीति अपनाएं। यह पूर्णतः आयात पर प्रतिबंध लगाने या केवल “जस्ट इन केस” रणनीति पर निर्भर रहने से कहीं आगे है। “जस्ट टू बी सिक्योर” के लिए “ट्रस्ट बट वेरीफाई” और “ज़ीरो ट्रस्ट” मॉडल काम में आ सकते हैं। संचार, परिवहन या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाली तकनीकी उत्पादों और सेवाओं का आवधिक ऑडिट, निरीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुपालन सुनिश्चित करने के तंत्र के माध्यम से मूल्यांकन किया जा सकता है। वहीं, सैन्य, खुफिया एजेंसियों या अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास में इस्तेमाल होने वाली अति-महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए “ज़ीरो ट्रस्ट” मॉडल अत्यावश्यक है, जहाँ सभी उत्पादों और सेवाओं को संभावित रूप से खतरनाक मानकर काम किया जाए। कम महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए, विक्रेताओं में विविधता और मित्र देशों के साथ सहयोग “जस्ट इन केस” रणनीति को मजबूत बना सकता है।

भारत के लिए सप्लाई चेन सुरक्षा की रणनीति

भारत के लिए एक दोहरी रणनीति अपनाना आवश्यक है। “जस्ट टू बी सिक्योर” के तहत, महत्वपूर्ण तकनीकी उत्पादों और सेवाओं की सख्त जाँच-पड़ताल और निरंतर निगरानी की जानी चाहिए। “ट्रस्ट बट वेरीफाई” मॉडल उन क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है जहाँ कम जोखिम है। इसके साथ ही, “जस्ट इन केस” रणनीति विक्रेताओं में विविधता लाकर और भरोसेमंद देशों के साथ संबंध मजबूत कर लचीलापन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करनी चाहिए।

मुख्य बिंदु:

  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ अब केवल दक्षता और लचीलापन पर नहीं, बल्कि सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
  • अमेरिका और इजरायल में हुई घटनाओं ने सप्लाई चेन सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है।
  • भारत को “जस्ट टू बी सिक्योर” और “जस्ट इन केस” दोनों रणनीतियों का संयोजन अपनाना चाहिए।
  • “ट्रस्ट बट वेरीफाई” और “ज़ीरो ट्रस्ट” मॉडल महत्वपूर्ण तकनीकी उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक हो सकते हैं।
  • विक्रेताओं में विविधता और मित्र देशों के साथ सहयोग आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक लचीला बना सकता है।

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