नई दिल्ली। नक्सल प्रभावित 35 जिलों समेत 115 जिलों में विकास की रफ्तार तेज करने को यूं तो पूरा सरकारी तंत्र लगा है। लेकिन उनके बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ा दी गई है। तय हुआ है कि जो जिला कसौटी पर सबसे आगे खड़ा होगा वहां 14 अप्रैल को बाबा साहेब आंबेडकर जयंती मनाने खुद प्रधानमंत्री मोदी जाएंगे। जिम्मेदारी के लिहाज से इन जिलों को नीति आयोग समेत 14 मंत्रालयों व विभागों में बांटा गया है।
इसके साथ हर केंद्रीय मंत्री के निजी सचिवों को भी जरूरत के मुताबिक अपने वजीरों का ध्यान केंद्रित करते रहने को कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इन सचिवों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने इन जिलों से संबंधित ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने को कहा जहां उनका मंत्रालय दखल देकर विकास कार्य की गति को तेज कर सकता है।सरकार ने इन जिलों का चयन स्वास्थ्य व पोषण, शिक्षा, कृषि व इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों, वित्तीय समावेशन व कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के आधार पर किया है।
इन जिलों को एस्पिरेशनल डिस्टिक्ट का नाम दिया गया है। इन जिलों के लिए छह फोकस एरिया तय किए गए हैं, जिनमें काम होना है। इनमें स्वास्थ्य व पोषण, शिक्षा, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि व जल संसाधन, वित्तीय समावेशन व कौशल विकास और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए रणनीति तैयार करना है। इन जिलों के विकास के लिए धनराशि देने के साथ-साथ ‘डिस्टिक्ट एक्शन प्लान’ भी बनाए जाएंगे। साथ ही सामाजिक-आर्थिक विकास के अलग-अलग पैमाने पर समयबद्ध लक्ष्य तय कर रैंकिंग की जाएगी।
कामकाज का प्रदर्शन तय करने के लिए नीति आयोग ने 48 प्रमुख इंडीकेटर की सूची बनाई है। इनकी रियल टाइम निगरानी के लिए आयोग एक तंत्र विकसित कर रहा है। सरकार ने इन जिलों की स्थिति सुधारने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों में तैनात अतिरिक्त और संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों को प्रत्येक पिछड़े जिले का ‘प्रभारी अधिकारी’ भी बनाया है।
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