नई दिल्ली, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कक्षा दसवीं का गणित और बाहरवीं का अर्थशास्त्र का पेपर लीक हो गया था। जिसके बाद इस मामले की जांच करने के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। इसके अलावा मामले की जांच के लिए एसआईटी का भी गठन किया गया है।
इस मामले के सामने आने के बाद छात्रों और पैरेंट्स ने सीबीएसई की खामियों के लिए आलोचना की और उसपर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। जिसके बाद दोबारा इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सीबीएसई ने सख्त कदम उठाए हैं। आज हम आपको बताते हैं कि कैसे एक प्रश्नपत्र बनता है और बच्चों तक पहुंचाया जाता है।
1. जुलाई में सीबीएसई की एकेडमिक यूनिट हर विषय के आधार पर एकेडमिक सेशन के प्रश्नपत्रों का ब्लूप्रिंट बनाती है। इसमें आसान और कठिन सवालों को शामिल किया जाता है।
2. इसके बाद ब्लूप्रिंट को पेपर सेटर के पास भेज दिया जाता है जो उसके हिसाब से प्रश्न बनाते हैं। वह आसान, थोड़े मुश्किल और कठिन श्रेणियों के 60 प्रश्न बनाते हैं। किसी भी पेपर सेटर को यह नहीं पता होता है कि कौन से सवालों का चुनाव किया जाएगा।
3. इन प्रश्नों को मॉडरेटर्स के पास भेजा जाता है जो ब्लूप्रिंट और सिलेबस के आधार पर हर क्षेत्र को भेज देते हैं। अगस्त तक वह ए, बी, सी तीन सेट बनाते हैं। जिसमें सवाल या तो अलग हो सकते हैं या फिर नहीं भी। यह सभी सेट हाथों से लिखे जाते हैं ताकि लीक होने पर उस शख्स का पता किया जा सके।
4. बोर्ड सभी सेट्स के पेपर को सिक्योरिटी प्रिंटर्स के पास छपाई के लिए भेज देता है। यह प्रिंटर देशभर में मौजूद होते हैं और उन्हें सेंटर पर आधारित कोटा के आधार पर भेजा जाता है। इनमें परीक्षार्थियों की संख्या से ज्यादा या कम प्रश्नपत्र नहीं छापे जाते हैं।
5. परीक्षा से एक हफ्ते पहले प्रिंट किए गए प्रश्नपत्रों को एक सीलबंद डिब्बे में बंद करके सेंटर के नजदीक बने नामित बैंक में भेज दिया जाता है।
6. परीक्षा वाली सुबह सीबीएसई जांचकर्ता हर सेंटर भेजे जाते हैं। उन्हें एसएमएस के जरिए सूचना दी जाती है कि प्रश्नपत्र के कौन से सेट को बैंक से लेना है। परीक्षा से एक घंटे पहले जांचकर्ता बहुत से गार्ड के साथ मिलकर प्रश्नपत्र के सेट को सेंटर तक लाते हैं।
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