हिजाब का विरोध करने वाले कर्नाटक के मंत्री ने किया स्कूलों में गीता का समर्थन, छिड़ गया विवाद

डेस्क। कर्नाटक कांग्रेस नेता के.रहमान खान ने शनिवार को भूपेंद्रभाई पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार द्वारा, ‘भगवद गीता शैक्षणिक वर्ष 2022 से राज्य में कक्षा 6 से 12 के लिए स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होगी’ ऐलान के बाद भाजपा पर “निहित स्वार्थ” छुपा होने का आरोप लगाया। 

मामले ने गंभीर रूप तब ले लिया जब कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा था कि दक्षिणी राज्य एक समान कदम उठाएगा “अगर विशेषज्ञ इसे मंजूरी देते हैं”। सीधे शब्दों में कहे तो उन्होंने गुजरात सरकार के इस फैसले का समर्थन किया था और कर्नाटक में भी इसको लागू करने का विचार व्यक्त किया।

इसपर कर्नाटक के कांग्रेस नेता ने गृहमंत्री को शिकंजे में लिए। उन्होंने कहाँ, “हर धार्मिक पुस्तक ‘धर्म’ सिखाती है, आप यह नहीं कह सकते कि यह केवल गीता है जो ‘धर्म’ और भारतीय संस्कृति सिखाती है। सभी धार्मिक पुस्तकों को पढ़ाया जाना चाहिए। इस फैसले में भाजपा का निहित स्वार्थ है। 

जानिए कर्नाटक के गृह मंत्री ने क्या कहा था?

 कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने गुजरात की तर्ज पर कहा था कि वे भगवद गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं।  अगर वे धार्मिक किताब लिखते हैं तो कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन भारत कई धर्मों वाला विविधता वाला देश है।” आगे उन्होंने मीडिया एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान कहा “भगवद गीता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है, यह सभी के लिए है। जानकारों की मानें तो इसे जरूर पेश किया जाएगा। हालांकि, यह इस साल के लिए नहीं, बल्कि अगले साल से किया जाएगा।” 

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