सूत्रों की मानें तो बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के सरकार में यहां मंत्री रहने वाले एक शख्स को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की समीक्षा बैठक में न बुलाया जाना पार्टी के पूर्व केबिनेट मंत्री द्वारा भीतरघात कर इस बार के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा का साथ देने का चल रहे घमासान के मायने लगाए जा रहे हैं ? दरअसल,कुशीनगर जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव में सपा समर्पित समर्पित उम्मीदवार हरीश राणा के हार के बाद समाजवादी पार्टी में हार की ज़िम्मेदारी को लेकर भी आंतरिक घमासान मचा हुआ है,चुनाव से पहले जिस तरह से यहां के पूर्व सांसद व वर्तमान के एमएलसी व जिला अध्यक्ष सहित पूर्व मंत्री के अलावा सपा के वरिष्ठ पदाधिकारियोंने अपनी पूरी ताकत पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष के उम्मीदवार हरीश राणा को जिताने के लिए अपने नेतृत्व में जिला पंचायत सदस्यों को ले लिया था,वही राजनीतिक चर्चाओं पर गौर करें तो जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मतदान के अंत तक सपा प्रत्याशी हरीश को जीत दर्ज कराने वाले जिला पंचायत सदस्यों ने ही एक पूर्व मंत्री के इशारे पर सपा समर्थित उम्मीदवार के साथ न हो कर भाजपा समर्थित उम्मीदवार को मत देकर अपने ही पार्टी के नेता को हराने का काम किया है ?
सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी में दरार तो चुनाव से पहले ही पड़ चुकी थी,जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में हार के बाद नेताओं ने पार्टी के ही एक पूर्व मंत्री के इशारे पर भीतर घात करने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी से ही जुड़े लोग पडरौना नगर के चौक चौराहे के अलावा फेसबुक व्हाट्सएप पर चर्चा करने का सिलसिला शुरू कर दिया है |
हालांकि सपा को इस बार के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में इतनी बड़ी मिली हार के बाद भी पार्टी के नेता हार के कारण को सिर्फ चौक चौराहे के अलावा फेसबुक व्हाट्सएप पर ही चर्चा बनाए हुए हैं जबकि हार का असली कारण सपा के वरिष्ठ नेता अभी मीडिया के सामने पुष्टि ही नहीं कर पा रहे हैं ? बहरहाल राजनीतिक सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच गत कुछ माह पहले हुई किसी बात को लेकर गाली गलौज के मामले में चली आ रही दरार ने इस बार के हुए जिला पंचायत के उप चुनाव में सपा समर्थित अध्यक्ष पद के उम्मीदवार हरीश राणा को हार का सामना करना पड़ा है ?
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