लखनऊ, प्रदेश सरकार द्वारा एक तरफ मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं पर जिन मछलियों को सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया उन्हें मत्स्य पालक पाल रहे हैं। जिससे कई गंभीर बीमारी फैलाने का खतरा है। मछली पालन किसानों की आय बढ़ाने का एक अच्छा साधन है वहीं पर जब किसानों द्वारा प्रतिबंधित मछलियां पाली जाएंगी तो बीमारी का स्तर बढ़ता जाएगा।
बख्शी का तालाब स्थित चंद्र भानु गुप्ता कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि थाई मांगुर मछली 2000 में भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दी गई थी क्योंकि यह मछली पानी के अंदर पाये जाने वाले लाभदायक शैवालो तथा लाभदायक प्रजातियों की छोटी मछलियों को खा जाती थी। थाई मांगुर मछली मांसाहारी मछली है और यह मांस को बड़े चाव से खाती है जिसकी वजह से सड़े हुए मांस खाने से मछलियों के शरीर की वृद्धि एवं विकास बहुत तेजी से होता है यह मछलियां तीन माह में दो से 10 किलोग्राम वजन की हो जाती हैं। इन मछलियों के अंदर घातक हेवी मेटल्स जिसमें आरसेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, मरकरी, लेड अधिक पाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक हानिकारक है।
यह मछलियां पशुओं के मांस के साथ-साथ मनुष्यों के मांस को भी खाती हैं मांस में पूर्व में अवशोषित जहरीले कीटनाशक इस मछली के मांस में काफी समय तक उपस्थित रहते हैं। इन्हीं सब कारणों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2000 में इस मछली के पालन तथा प्रजनन केंद्रों पर रोक लगा दी थी और आज भी यह रोक लगी हुई है। इस मछली की वृद्धि एवं विकास तेज रफ्तार में होने के कारण कम समय में यह बाजार में पहुंच जाती है और सस्ती होने के कारण इसे लोग अधिक क्रय करते हैं, इस मछली के द्वारा प्रमुख रूप से गंभीर बीमारियां जिसमें हृदय संबंधी बीमारी के साथ न्यूरोलॉजिकल, यूरोलॉजिकल, लीवर की समस्या, पेट एवं प्रजनन संबंधी बीमारियां तथा कैंसर जैसी घातक बीमारी अधिक हो रही है।
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