दवा विज्ञापन: सच या झूठ का खेल?

भारतीय दवा नियामक, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मुंबई स्थित दवा कंपनी, एंटोड फार्मास्युटिकल्स के लाइसेंस को निलंबित करने के बाद अब गुजरात के खाद्य और औषधि नियंत्रण प्रशासन (FDCA) को कंपनी के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई 1954 के औषध और जादूगर उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम के तहत की जाएगी। यह निर्णय एक जन स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. के.वी. बाबू की शिकायत के बाद लिया गया है, जिसमें एंटोड फार्मास्युटिकल्स पर अपनी आँखों की बूंदों “प्रेसव्यू” के लिए अत्यधिक दावे करने का आरोप लगाया गया था। डॉक्टर बाबू ने आरोप लगाया कि कंपनी ने ट्वीट करके प्रिस्क्रिप्शन दवा के बारे में जनता को गुमराह किया है और कानून का उल्लंघन किया है। इस घटना से दवा विज्ञापनों पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है।

एंटोड फार्मास्युटिकल्स और प्रेसव्यू आँखों की बूँदों पर कार्रवाई

एंटोड फार्मास्युटिकल्स ने अपनी आँखों की बूँदों, “प्रेसव्यू” को प्रेस्बायोपिया के इलाज के लिए लॉन्च किया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह “गर्व से भारतीय नवोन्मेष” है। हालांकि, कंपनी ने प्रेस्बायोपिया के इलाज के लिए अत्यधिक दावे किये, जिसके चलते CDSCO ने कंपनी के लाइसेंस को निलंबित कर दिया। यह कंपनी द्वारा “प्रेसव्यू” को लेकर किए गए ट्वीट के कारण भी हुआ, जिसमें कंपनी ने दावा किया था कि यह दवा पढ़ने के चश्मे की आवश्यकता को समाप्त कर देगी। यह दावा बिना पूर्व स्वीकृति के किया गया था, जो कि औषधि विज्ञापन नियमों के विरुद्ध था।

प्रेस्बायोपिया और दवा विज्ञापन नियम

प्रेसबायोपिया एक ऐसी स्थिति है जिससे आँखों की नज़दीकी वस्तुओं को देखने की क्षमता कम हो जाती है। एंटोड फार्मास्युटिकल्स ने अपने उत्पाद के लिए ऐसे दावे किए थे जो औषध और जादूगर उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के अनुच्छेद 3(घ) के विरुद्ध थे। इस धारा के अनुसार, किसी भी दवा के निदान, उपचार या रोकथाम के संबंध में गलत या भ्रामक विज्ञापन नहीं किया जा सकता। एंटोड द्वारा किया गया ट्वीट इसी धारा का उल्लंघन करता है।

डॉ. बाबू की शिकायत और RTI

डॉ. के.वी. बाबू ने एंटोड फार्मास्युटिकल्स के खिलाफ CDSCO में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कंपनी पर दवा के बारे में अत्यधिक दावे करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से अपनी शिकायत की स्थिति जानने का प्रयास किया। CDSCO ने अपनी RTI जवाब में बताया कि इस मामले को गुजरात के FDCA को उचित कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। यह डॉक्टर बाबू की शिकायत की गंभीरता और एंटोड के खिलाफ कार्रवाई की गंभीरता को और बढ़ाता है।

औषध और जादूगर उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954

1954 का औषध और जादूगर उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, दवाओं और अन्य उपचारों के विज्ञापनों को नियंत्रित करता है ताकि जनता को भ्रामक या गलत जानकारी से बचाया जा सके। यह अधिनियम यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि दवा कंपनियां अपने उत्पादों के बारे में सही और सटीक जानकारी दें, और अत्यधिक या झूठे दावे न करें। यह अधिनियम सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और जनता के हित में एक महत्वपूर्ण क़ानून है। यह कानून विभिन्न बीमारियों के इलाज में गलत दावे करने वाली कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह समाज में दवाओं से जुड़ी गलतफहमियों को कम करने में भी मदद करता है।

CDSCO की कार्रवाई और भविष्य के निहितार्थ

CDSCO ने एंटोड फार्मास्युटिकल्स के लाइसेंस को निलंबित कर दिया है और FDCA गुजरात को आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस घटना से दवा विज्ञापनों पर नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं। यह यह भी स्पष्ट करता है कि सर्वोच्च नियामक अत्यधिक दावों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने के लिए तत्पर है। यह अन्य दवा कंपनियों के लिए एक चेतावनी का काम करता है कि वे अपने विज्ञापनों और दावों के बाबत सावधानी बरतें। कंपनी द्वारा किये गए अत्यधिक दावे न केवल जनता को गुमराह करते हैं, बल्कि उनके स्वास्थ्य को भी खतरे में डालते हैं। इसलिए सख्त विनियम और उचित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक हैं।

मुख्य बातें:

  • एंटोड फार्मास्युटिकल्स के “प्रेसव्यू” आँखों की बूँदों पर अत्यधिक दावे करने के कारण CDSCO ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।
  • कंपनी पर 1954 के औषध और जादूगर उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
  • डॉ. के.वी. बाबू की शिकायत के कारण यह कार्रवाई की गई।
  • यह घटना दवा विज्ञापनों पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है।

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