बांगरमऊ उन्नाव प्रख्यात कवि व शायर डॉ रफीक “रससिंधु” बिलग्रामी के साहित्य लोक नागार्जुन स्मृति सम्मान समारोह के अवसर पर हरित लोक होटल के परिसर में बीती रात एक कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें कवि व शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम सुनाकर खूब वाह-वाही लूटी।
इस कवि सम्मेलन व मुशायरे की शुरुआत मशहूर शायर इरशाद कानपुरी ने हम्द पाक से व कवि प्रमोद कुमार ने सरस्वती वंदना से की।
उसके बाद शायर हाजी अब्दुल लतीफ कमालगंजवी ने अपना कलाम पढ़ा—“मीठा-मीठा बोलने वाले लोग थे कितने जहरीले, हमने उनके होंठ जो चूमे होठ हुए नीले- नीले। ऐसी उजली-उजली बातें जैसे हीरे मोती हों, बाहर बाहर शीशे जैसे अंदर अंदर पथरीले।।” जिसे सुनकर श्रोताओं ने खूब दाद दी। उसके बाद शायर डॉ जुबेर सिद्दीकी संदीलवी ने अपना कलाम सुनाया—“हजार बार वो लफ्जों को तोलते होंगे, तेरे हुज़ूर जो लब अपने खोलते होंगे।” जिस पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। हरदोई से आए प्रसिद्ध कवि पवन कश्यप ने जब अपनी रचना पढ़ी—“अब तो आ जाओ हंसी रात हुई है देखो, चांद तारों की बारात हुई है देखो।” जिसे सुनकर नौजवान श्रोता झूमने पर मजबूर हो गए। मशहूर शायर इरशाद कानपुरी ने अपना कलाम बेहतरीन अंदाज में तरन्नुम के साथ पढ़ा—” रुसवाइयों के खौफ ने रोने नहीं दिया, मुझको तेरे ख्याल ने सोने नहीं दिया। गरकाब कई ले आया था तूफाने गम मुझे, मां बाप की दुआ ने डुबोने नहीं दिया।।” जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसके बाद साहित्य लोक नागार्जुन स्मृति सम्मान से सम्मानित हुए प्रख्यात कवि व शायर डॉ रफीक “रस सिंधु” बिलग्रामी ने पढ़ा—” हम इधर तुम उधर उदास-उदास, इश्क का है सफर उदास-उदास। शाम की हर शहर उदास-उदास, हूँ तो जिंदा मगर उदास-उदास।।” क्रम को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ कवि मधुर गंजमुरादाबादी ने पढ़ा—” क्रांति का नव राग लिखना चाहती है, लेखनी अब आग लिखना चाहती है। चेतना डूबे न सपनों की परिधि में, सो रहा रस जाग लिखना चाहती है।।” इस क्रम को और आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम आयोजक व वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र कटियार ने पढ़ा—” अगर सच बोल करके हम गलत हैं, नहीं जो बोलते क्या कम गलत हैं। तुम्हारे सही को क्यों सही माने, बताओ तो कहां पर हम गलत हैं।।”जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया। इसी क्रम में नगर के नौजवान कवि व शायर फजलुर्रहमान “फ़ज़्ल” ने अपना कलाम तरन्नुम से पढ़ा—“जरा सी बात पे ईमान बदल जाते हैं, बुरा हो वक़्त तो इंसान बदल जाते हैं। अभी ईमान गरीबों के पास बाकी है, देख कर माल को धनवान बदल जाते हैं।।” शायर शमसुल हसन “शम्स” ने सुनाया—” जीने की आरजू है न मरने की बात है, बिखरी हुई हयात सवरने की बात है। फूलों की मंजिले तो कदम चूम लें मगर, कांटो की सरजमी से गुजरने की बात है।।”शायर मौलाना इब्राहिम “अब्र” ने पढ़ा—“कोई आया था मेरी बज़्म सजाने के लिए, दे गया दर्द जमाने को दिखाने के लिए। इसके अलावा कवि अमोल सिंह “अमर”, प्रमोद कुमार, वीर सिंह पटेल, बरकत अंसारी, जमालुद्दीन, जाने आलम, मोइनुद्दीन, राम बिहारी वर्मा, दिनेश तिवारी, आदि कवि व शायरों ने भी अपनी- अपनी रचनाएं सुनाईं। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ सतीश दीक्षित ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक व वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र कटियार ने मशहूर शायर डॉ रफीक बिलग्रामी को शाल ओढ़ाकर व दस हजार नगद पुरस्कार राशि भेंट कर साहित्य लोक नागार्जुन स्मृति सम्मान से सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र भी दिया।और प्रसिद्ध कवि नागार्जुन के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर डॉ मुन्ना अल्वी, राजा बाबू, हाजी सलीम खां, डॉ इरफान, आजाद खां, वाहिद हुसैन, राघव मिश्रा, मेराज अंसारी, इसरार खान, अफजाल, अबरार खां, बबलू खां सहित काफी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।।
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