चार साल में 78 कुष्ठरोगियों की मौत का कारण नहीं बता पाई दिल्ली सरकार

चार साल में 78 कुष्ठरोगियों की मौत का कारण नहीं बता पाई दिल्ली सरकार

 

 

दिल्ली सरकार कुष्ठ और क्षय रोग पीड़ितों के लिए बने सरकारी भिक्षु गृह में 78 रोगियों की मौत का कारण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बीते चार साल में बार-बार पूछे जाने के बावजूद अब तक नहीं बता पायी है. आयोग अब तक तीन विभागों के अधिकारियों से अलग-अलग जांच कराने को कह चुका है लेकिन नतीजा सिफर ही रहा.

आयोग ने सरकार के इस रवैये पर हैरानी जताते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव को ताहिरपुर स्थित भिक्षु गृह में साल 2008 से 2012 के बीच 78 कुष्ठ रोगियों की मौत के कारणों की जांच कराने को कहा है. आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव को जारी नोटिस में एसडीएम की जांच रिपोर्ट अगले साल 21 जनवरी तक पेश करने का निर्देश दिया है.

इस बारे में दिल्ली सरकार की ओर से ये कहते हुए कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इंकार कर दिया गया कि मामला आयोग में विचाराधीन है और सरकार आयोग के समक्ष ही अपना जवाब प्रस्तुत करेगी.

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग के संचालित इस भिक्षु गृह में 78 कुष्ठ रोगियों की मौत का खुलासा अप्रैल 2013 में विभाग की ओर से दिए गए आरटीआई के जवाब में हुआ था. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी परिषद के आरटीआई आवेदन में इस भिक्षु गृह में कुष्ठ और क्षय रोगियों की देखभाल के बदइंतज़ामों के बारे में पूछा गया था. इसके जवाब में विभाग ने माना कि भिक्षु गृह की क्षमता 300 लोगों को रखने की है लेकिन उस समय इसमें 595 रोगी रह रहे थे.विभाग ने सीमित संसाधनों वाले इस भिक्षु गृह में साल 2008 से 2012 के बीच 78 रोगियों की मौत का ब्योरा तो अपने जवाब में दे दिया था लेकिन इनकी मौत की वजह अब तक नहीं बता पाया है.

विभाग के जवाब पर संगठन के प्रमुख राजहंस बंसल ने सितंबर 2013 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष भिक्षु गृह में वित्तीय अनियमितताओं को रोगियों की मौत की वजह बताते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की.

आयोग के बार-बार के नोटिस पर समाज कल्याण विभाग ने फरवरी 2015 में आयोग के समक्ष एक रिपोर्ट तो पेश कर दी लेकिन इसमें रोगियों की मौत का कारण और वित्तीय अनियमितताओं पर एक शब्द नहीं बोला. इस पर आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर गृह विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी को रोगियों की मौत का कारण पता कर भिक्षुओं की दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी भी देने का आदेश दिया.

इस पर भी सरकार से कोई रिपोर्ट नहीं मिलने से नाराज़ आयोग ने इस साल दो अगस्त को मुख्य सचिव को समन जारी कर 26 अगस्त को खुद पेश होने का निर्देश दिया. इस पर दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने गत सितंबर में आयोग के समक्ष दो रिपोर्ट तो पेश कर दीं लेकिन इनमें सिर्फ 22 रोगियों की मौत की वजह का खुलासा किया जबकि आयोग ने प्रत्येक रोगी की मौत का अलग-अलग कारण बताते हुए रिपोर्ट देने को कहा था.

मामले की 13 नवंबर को हुई पिछली सुनवाई पर आयोग ने मुख्य सचिव से कुष्ठ एवं क्षय रोग से पीड़ित भिक्षुओं के लिए ताहिरपुर स्थित भिक्षु गृह में चिकित्सा एवं अन्य सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है. साथ ही 78 रोगियों की मौत के कारणों की जांच पूर्वी दिल्ली के एसडीएम से किसी प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि की मौजूदगी में करा कर अगले साल 21 जनवरी तक रिपोर्ट देने का अंतिम अवसर दिया है.

आयोग ने मुख्य सचिव से ये बताने को भी कहा है कि केजरीवाल सरकार के हाल ही में गरीबों को दस रुपये में भोजन मुहैया कराने की हाल ही में शुरू की गयी योजना के तहत क्या दिल्ली के सभी आश्रय स्थलों में रहने वालों को भी भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है.

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