हिजाब को लेकर क्यों ओवैसी ने किया ईरान का जिक्र

देश– कल हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच का फैसला आया। दोनो जजों के इसपर अलग अलग मत देंखने को मिला और इस मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच में होने की सिफारिश की गई। फैसला अभी तक इस मामले पर स्पष्ट नही आया है लेकिन राजनैतिक गलियारों में एक बार पुनः इस मामले को लेकर विवाद छिड़ गया है।
वही खुद मुस्लिम हितैषी बताने वाले एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने इस मसले को लेकर एक नया बयान दिया है। उन्होंने कहा हमे हमारे पूर्वजों ने कठिन संघर्ष करने अंग्रेजों की बेड़ियों से आजादी दिलाई। वही आज हमारे यहां हमारी ही बेटियों से हिजाब को लेकर सवाल किया जा रहा है।
ओवैसी ने आगे कहा, आज लोग यह कह रहे हैं कि हिजाब पिछड़ेपन की निशानी है। हम यह कहते हैं कि हम हिजाब इसलिए पहनते हैं क्योंकि इसका जिक्र कुरान में किया गया है। यह अल्ल्लाह का हुक्म है। हमे यह अधिकार संविधान में मिला है कि हम अपने लिए इसे चुन सके।
अगर हमारी कोई बेटी कपड़ा पहनती हैं। तो इसका यह बिल्कुल मतलब नही है कि हमने उसके दिमाग को कवर कर लिया है। हमारे देश में अलग अलग तरह के लोग रहते हैं। अलग अलग विचारधारा है हमने किसी से यह नही कहा की वह लोग हमारी तरह वस्त्र धारण करे। तो जब हमारी बेटियां कुछ पहनती हैं तो किसी को तकलीफ क्यों होती है। 
ओवैसी ने कहा, ”हैदराबाद की सड़कों पर सबसे ख़तरनाम मोटरसाइकिल-गाड़ी जो चलाता है वो हमारी बहनें चलाती हैं बुरके के साथ. कभी इनके पीछे मोटरसाइकिल-गाड़ी लेकर मत जाना. क्या हमारी बच्चियां डॉक्टर, इंजीनियर, एमबीए, एमसीए नहीं पढ़ रही हैं, भारत को मजबूत नहीं कर रही हैं? 
वही ईरान का जिक्र करते हुए वह बोले लोग हमारी तुलना ईरान से कर रहे हैं। तर्क दे रहे हैं कि ईरान में।लड़कियां अपने बाल काट रही है हिजाब फूंक रही है। लेकिन हमें ईरान से क्या मतलब उससे हमारा क्या ताल्लुक है। हम हैदराबाद में सिर्फ ईरान की चाय पीते हैं। बाकी हमारे यहां महिलाओ को अधिकार है कि वह अपने लिए निर्णय ले सकें और यह निर्धारित कर सके उन्हें क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं।

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