दिल्ली के शमशान घाटों पर शवों के दाह संस्कार की एक बार फिर बढ़ी किल्लत

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नई दिल्ली। दिल्ली में अप्रैल महीने से एक बार फिर कोरोना के कारण हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, बढ़ते मामलों को देख श्मशान घाट और कब्रिस्तान तैयारियों में जुट चुके हैं। दिल्ली में बढ़ते कोरोना का असर दिल्ली के शमशान घाटों पर पड़ने लगा है। जिधर एक तरफ महीने भर पहले तक हालात सामान्य थे तो कोविड शवों की निर्धारित चिताओं पर नॉन कोविड शवों का दाह संस्कार किया जाता था, लेकिन बढ़ते कोरोना के प्रभाव को देखते हुए एक बार फिर कोरोना शवों के लिए जगह निर्धारित हो चुकी हैं।

गाजीपुर शमशान घाट के करता धर्ता सुनील शर्मा बताते है कि, “दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च शुरूआत तक हम कोविड वाली जगहों पर नॉन कोविड शवों का अंतिम संस्कार कर रहें थे क्योंकि कोविड के शव आना ही बंद हो गए थे।”

“पिछले 10 से 15 दिन में कोरोना संक्रमण से होने वाली मृत्यु बढ़ते ही श्मशान घाट पर शव आने लगे हैं जिसके कारण हमने एक बार फिर कोविड शवों के लिए जगह निर्धारित कर दी है और पहले की तरह नियमों का पालन कर अंतिम संस्कार किया जाने लगा है।”

दिल्ली के मंगोलपुरी शमशान घाट के करता धर्ता मनोज कुमार ने बताया कि, “बीते कई महीनों से कोविड शव नहीं आ रहे थे जिसके कारण सामान्य शवों का भी अंतिम संस्कार किया जा रहा था, लेकिन बीते 15 दिनों से एक बार फिर कोविड शव आने लगे हैं।”

“हमारे शमशान घाट में 20 कोविड शव और 20 नॉन कोविड शवों के लिए जगह निर्धारित की गई है, जिधर अंतिम संस्कार किया जा सकता है।”

दिल्ली के निगमबोध शमशान घाट के मुख्य सुपरवाइजर अवदेश शर्मा ने बताया कि, “जनवरी फरवरी और मार्च हर दो दिन छोड़ कर एक कोविड शव आते थे, एक अप्रैल से कोविड शव बढ़ गए हैं। 11 अप्रैल से अब तक 25 से 30 शव आने लगे हैं।”

कोरोना संक्रमण के कारण हर दिन लोगों की जान जा रही है। ऐसे में दिल्ली में निगमबोध घाट, पंजाबी बाग श्मशान घाट और लोदी रोड का मुक्तिधाम केंद्र शवदाह के लिए प्रमुख केंद्र हैं। इन सभी जगहों पर कोरोना शवों की अंतिम क्रिया की अनुमति दी गई है।

इनके अलावा पूर्वी दिल्ली में गाजीपुर श्मशान घाट, कड़कड़डूमा घाट और दो कब्रिस्तानों शास्त्री पार्क, खिचड़ीपुर के पास बने कब्रिस्तान में भी कोरोना शवों की अंतिम क्रिया की अनुमति दी गई है। आईटीओ के पास स्थित कब्रगाह पर भी कोरोना शवों की अंतिम क्रिया की जा रही है।

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