लाकडाउन :जहाँ बरसती थी भक्तों पर छाया ,वहाँ पड़ चुका है कोरोना का साया

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रिपोर्ट:हर्ष यादव

अमेठी। इस बार नवरात्र पर कोराना वायरस का साया पड़ चुका है। लोगों को इस बार देवी मंदिरों के दर्शन नहीं मिल रहे हैं।क्षेत्र के सभी प्रमुख पौराणिक मंदिरों के पट बंद किए जा चुके हैं।वही दादरा गाँव मे स्थित पौराणिक देवी हिंगलाज मन्दिर का पट बन्द है।
भारतीय उपमहादीप में आदि शक्ति के नाम से जानी जाने वाली देवी माँ हिंगलाज का मंदिर अमेठी के दादरा गाँव में स्थित है हिँगलाज मंदिर की स्थापना सँत कवि बाबा पुरषोत्तम दास ने लगभग हजार वर्ष पूर्व में की थी जो सन्त तुलसीदास जी के समकालीन थे । दरअसल पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रान्त के ल्यारी जनपद के हिंगुल पर्वत पर माता हिँगलाज का धाम है जो मुख्य शहर कराची से 250 किलो मीटर दूरी पर है बलोचवासियो के लिये यह मंदिर समान रूप से महत्वपूर्ण है हिँगलाज माता के मेले में केवल हिन्दू श्रद्धालु ही नही मुसलमान भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है जहाँ हिन्दुस्तान में भक्त हिँगलाज देवी को ”माँ” कहकर पुकारते है वही पाकिस्तान में मुसलमान ” नानी का मंदिर ”कहते है 52 सिद्ध पीठो में अग्रणी माँ देवी हिँगलाज आज भी भारत पाकिस्तान की आपसी प्रेम सद्भाव एवम् श्रद्धा की प्रतीक है।

क्या कहते हैं हिंगलाज सेवक….

दादरा गाँव निवासी व माता हिंगलाज सेवक अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शासन व प्रशासन के निर्देश पर पूरा मन्दिर परिसर को बंद रखा गया है बीते नौ रात्रो में हजारो महिला और पुरुषों की यहाँ भीड़ होती थी लेकिन आज ताला बंद है सिर्फ पुजारी के द्वारा ही पूजा अर्चना की जा रही है ।और महामारी के चलते 600 वर्ष पहले तत्कालीन सन्त कवि बाबा पुरषोत्तम दास ने देवी हिंगलाज की स्थापना दादरा गाँव मे की थी। तब से लोगो का कल्याण हो रहा है।

क्या कहते है पुजारी…

हिंगलाज पुजारी पं शेष राम मिश्र बताते है कि सभी भक्तजन अपने घर में नवरात्रि के दिनों में माता रानी की पूजा करे,अपने जीवन को सफल बनावै।और देश हित के लिये सुख समृद्धि की कामना करें यही देवी जी की सच्ची भक्ति व आराधना है।

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