“श्रद्धालुओं” व “भक्तों” के “आस्था” के साथ कर दिया गया “खिलवाड़”,”सावन” के “पवित्र” महीने में “शिव लिंग” को उखाड़ फेंक दिया गया “आहर” में

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संवाददाता-विवेक चौबे

गढ़वा : “सावन” के पवित्र महीने में शिव लिंग पर जलार्पण कर “मनोकामना” पूरी करने की मन्नत मांगते हैं।कोई श्रद्धालु भोले बाबा के नगरी यानि बाबा धाम तो कोई श्रद्धालु कहीं और अन्य स्थानों पर भोले बाबा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर जाते हैं।वहीँ जो श्रद्धालु दूर नहीं जा पाते,वे भी पूर्ण आस्था के साथ अपने गांव या अपने घर के ही चबूतरे पर स्थापित शिवलिंग पर “जलाभिषेक” करते हैं।दूर व नजदीक की कोई तुलना न करते हुए पूर्ण विश्वाश के साथ जलाभिषेक हृदय से करते हैं।श्रद्धालुओं व बाबा के भक्तों के लगन व उत्साह में कोई कमी नहीं होती।

वहीँ लोग कहावत भी कहते हैं की मन सच्चा तो कठौती में ही गंगा।यदि मन,आत्मा व दिल पाक हो तो भगवान के प्रति कभी स्नेह में कोई कमी नहीं आती।लोग चबूतरे पर ही स्थापित शिव लिंग की पूजन अर्चना कर मन्नत पूरी होने की कामना सच्चे दिल से करते हैं।

आज जो “घटना” घटी,उसे जानकर कोई भी हैरान व दंग रह जाएगा

इतना बड़ा “कुकृत्य” कर दिया गया की “शिव लिंग” को ही उखाड़ फेंक दिया गया।

आइए,आपको “विस्तार” पूर्वक बताएं

कांडी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत ग्रामपंचायत-पतीला की ही तो घटना है। पतीला गांव स्थित हनुमान मंदिर के बगल में चबूतरे पर मंगलवार को ही एक “शिव लिंग” स्थापित किया गया था।लेकिन चबूतरे पर नहीं बल्कि रात्रि में शिवलिंग को उखाड़ कर आहर में फेंका हुआ पाया गया।

आखिर कौन ऐसा कर सकता है “कुकृत्य”,सोचनीय तथ्य

शिवलिंग को आहर में उखाड़ फेंकने की कुकृत्य तो अराजक तत्वों के द्वारा ही कहा जा सकता है।वहीँ स्थानीय लोगों का भी कहना है कि ऐसी कुकृत्य हरिजनों का ही हो सकता है।ऐसी घटना को लेकर तनाव का तो माहौल बना हुआ ही है।साथ हीं लोगों में काफी आक्रोश भी दिख रहा है।

आखिर आक्रोश भी क्यों न हो ?

जिसने भी ऐसा कुकृत्य किया है,किसी भी कोण से उसने ठीक नहीं किया है।

ग्रामीणों को जब इस घटना की जानकारी मिली की चबूतरे पर स्थापित शिव लिंग को आहर में फेंक दिया गया है तो आक्रोश के साथ आहर के पास सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

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