कानपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देशभर में लॉक डाउन लागू है और प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक लगातार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बात कर रहे हैं। शनिवार को एक कार्यक्रम में जनता को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में जागरूकर करने के लिए कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जाना था,लेकिन उसी कार्यक्रम में कार्मिकों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती नजर आईं।
शहर में तब्लीगी जमात के छह सदस्यों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। जमात के सदस्य जिले में जहां.जहां गए थे, उन क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों की जांच करने के साथ क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के फायदे बताने के साथ बचाव और सावधानियों से जागरूक करने की तैयारी की जा रही है।
इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कार्मिकों काे प्रशिक्षण देकर गांव में भेजने की तैयारी है। ताकि उन क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक करें और यदि किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण मिलें तो तत्काल क्वॉरंटाइन कराएं। इसके साथ ही सैनिटाइजेशन कार्यक्रम भी शुरू किया जाना है। इस कार्य के लिए अस्पतालों की स्टाफ नर्स,एएनएम,आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रशिक्षण देने के लिए स्वास्थ्य महकमे की ओर से चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्मिकों के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग का नहीं हुआ पालन
जिले भर से बसें लगाकर स्टाफ नर्स, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बुलाई गईं थी। लापरवाही की हद तो तब हो गई जब आडिटोरियम में बैठीं कार्मिकों के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कराया गया। इस दौरान शहरी स्वास्थ्य मिशन के प्रभारी एसीएमओ डॉ.एसके सिंह जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ.एके कनौजिया, एसीएमओ डॉ.जीके मिश्रा एवं डॉ. हनी मेहरोत्रा मौजूद रहीं।
सीएमओ डा.अशोक कुमार शुक्ला का कहना है कि,जिन क्षेत्रों में जमाती गए हैं, वहां सैनिटाइजेशन और घर-घर जाकर लोगों की जांच की जाएगी। इसके लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के समय शुरुआत में कुछ एएनएम और आशा कार्यकर्ता साथ साथ बैठ गई थीं। बाद में अधिकारियों ने उन्हें अलग-अलग करके निश्चत दूरी पर बिठाया।
Leave a Reply