ये नहीं है प्रेम का वास्तविक रूप

लाइफस्टाइल- प्रेम (love’)इस संसार का सबसे सुंदर अनुभव है। प्रेम के बिना व्यक्ति का जीवन अधूरा है। जो व्यक्ति प्रेम को नहीं समझता वह इस संसार मे कभी भी सुखी नहीं रहता है। अगर कोई व्यक्ति प्रेम(Love) में छल करता है तो ईश्वर उस व्यक्ति के जीवन को दुखों की खाई में धकेल देता है।
आज के समय में लोग जहां प्रेम के वास्तविक मूल को समझ नहीं पा रहे हैं। वहीं आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya about love,) ने प्रेम के वास्तविक स्वरूप का वर्णन चाणक्य नीति में किया है। आचार्य चाणक्य का मानना था कि वास्तविक प्रेम वही है जो निस्वार्थ है। जिसमे समर्पण का भाव होता है और जो सत्य को सबसे पहले देखता है।
आचार्य चाणक्य(Acharya Chanakya) ने कहा कि प्रेम सत्य है। जिसके बिना जीवन का कोई औचित्य नहीं। प्रेम वह भाव है जो दूसरों को दिया जाता है। अगर आप स्वयं से प्रेम करते हैं, स्वयं के लिए जीते हैं। आपका समर्पण सिर्फ आपके लिए है। तो यह प्रेम वास्तव में प्रेम नहीं स्वार्थ है।
चाणक्य (According to Acharya Chanakya)कहते हैं कि अगर कोई भोजन पहले ब्राह्मण को देता है और बाद में स्वयं भोजन करता है तो वह भोजन सर्वश्रेष्ठ होता है। प्रेम सत्य का स्वरूप है। अगर कोई स्वयं से प्रेम करता है तो वह वास्तविक प्रेम नहीं। क्योंकि प्रेम दूसरों को दिया जाता है। बुद्धि वही है जो आपको नकारात्मक मार्ग पर जाने से रोके। वहीं दान सफल वही है जो किसी को बिना बताए दिया जाए।
 

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