‘मोदी सुनामी’ ने कांग्रेस की इतनी बुरी हालत, UP में सभी प्रत्याशी की जमानत जब्त

‘मोदी सुनामी’ ने कांग्रेस की इतनी बुरी हालत, UP में सभी प्रत्याशी की जमानत जब्त

लखनऊ । लोकसभा चुनावों में आई ‘मोदी सुनामी’ ने देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को तबाह कर दिया। राजनीति का सबसे बड़ा गढ़ माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में देश की सबसे पुरानी पार्टी की हालत सबसे खराब रही, जहां उसके खाते में केवल 1 सीट ही आई। यूपी में कांग्रेस के केवल 4 प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके, बाकी की जमानत जब्त हो गई।

राहुल गांधी की अध्यक्षता में चुनाव में उतरी कांग्रेस राहुल के साथ ही प्रियंका गांधी के सहारे बेहतर परिणामों की उम्मीद कर रही थी। लेकिन आलम यह रहा कि दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा और राहुल गांधी परंपरागत सीट अमेठी तक को गंवा बैठे। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने रायबरेली में जीत हासिल कर पार्टी का खाता खोल दिया। कांग्रेस की इतनी बुरी हालत इमरर्जेंसी के दौर में हुई थी, जब 1977 में यूपी में पार्टी का खाता तक नहीं खुला था।

पूरे सूबे में कांग्रेस के केवल 4 ही नेता अपनी जमानत बचा सके। इनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, इमरान मसूद और श्रीप्रकाश जायसवाल शामिल रहे। रायबरेली में सोनिया ने 5,34,918 वोट पाए, जो कुल मतों का 55.8 प्रतिशत रहा। अमेठी में राहुल को 4,13,394 वोट (43.86%), कानपुर से श्रीप्रकाश जायसवाल को 3,13,003 वोट (37.13%), सहारनपुर से इमरान मसूद को 2,07,068 वोट (16.81%) हासिल हुए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद के अलावा निर्मल खत्री, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और अजय राय जैसे दिग्गज नेता भी अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे। 10 जगहों पर तो कांग्रेस प्रत्याशी ऐसे रहे, जिन्हें कुल पड़े वोटों का 2 प्रतिशत से भी कम हासिल हुआ। वहीं भदोही से कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे अखिलेश को नोटा से भी कम वोट मिला।

चुनाव आयोग के नियम के अनुसार अगर किसी प्रत्याशी को उस सीट पर पड़े कुल वोटों के 1/6 यानी कि 16.66 प्रतिशत से भी कम हासिल होता है, तो उसकी जमानत जब्त मानी जाती है। जमानत जब्त होने पर प्रत्याशियों के द्वारा जमा की गई 25 हजार रुपये की जमानत राशि जब्त हो जाती है।

बता दें कि 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 67 सीटों पर चुनाव लड़ी। बाकी 13 में से कुछ सीटें ऐसी रहीं जहां पार्टी ने दूसरे को समर्थन किया, जबकि कुछ जगहों पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया। ये सीटें हैं- पीलीभीत, मुजफ्फरनगर, मैनपुरी, मछलीशहर, कन्नौज, फिरोजाबाद, एटा, चंदौली, बागपत, बांसगांव, बलिया, आजमगढ़, अंबेडकरनगर।

 

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