अयोध्या । रामनगरी अयोध्या में 25 नवंबर को शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे के दौरे और विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा के चलते ठंड के मौसम में भी माहौल गर्म हो गया है। अयोध्या में एक बार फिर 6 दिसंबर 1992 जैसी हलचल तेज हो गई है। रविवार को आरएसएस के आनुषांगिक संगठन वीएचपी ने राम मंदिर के जल्द निर्माण के लिए दबाव बनाने के मकसद से धर्मसभा का आयोजन किया है। वीचएपी ने अपने कार्यक्रम को युद्ध के लिए बिगुल बजने से पहले का अपना आखिरी कार्यक्रम करार दिया है। इस बीच राजनीति भी तेज हो गई है और यूपी के पूर्व सीएम ने अयोध्या में सेना तैनात करने की मांग की है।
वीएचपी ने यूपी के विभिन्न इलाकों से ट्रेनों, बसों, ट्रैक्टर ट्रॉलियों और टैक्सियों के जरिए लोगों को बुलाना शुरू कर दिया है। यही नहीं, आरएसएस भी अपने तरीके से इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा है। अयोध्या के 200 किमी तक के दायरे को 1000 खंडों में विभाजित किया गया है और घर-घर जाकर लोगों से इस बाबत संपर्क किया जा रहा है ताकि हिंदू समाज को मोबिलाइज किया जा सके।
पुलिस सूत्रों की मानें तो शिवसेना और वीएचपी के आह्वान पर रविवार को अयोध्या में दो लाख से अधिक बाहरी लोगों की भीड़ पहुंच सकती है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक लोकल इंटेलिजेंस यूनिटों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा शिवसेना चीफ के अयोध्या दौरे से पहले अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। असल में योगी सरकार यहां दोनों मोर्चों पर सावधानी बरत रही है। एक तरफ उसका कहना है कि अयोध्या में राम भक्त जुट सकते हैं, दूसरी तरफ पुलिस और जिला प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने का आदेश दिया गया है।
पुलिस-प्रशासन की सतर्कता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को धार्मिक नगरी किले में तब्दील दिखी। प्रशासन ने कस्बे को 8 जोन और 16 सेक्टरों में बांटा है। राज्य सरकार ने पीएसी की टुकड़ियों की संख्या बढ़ाकर 20 से 48 कर दी है।
इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अयोध्या में सेना तैनात करने की मांग करते हुए कहा है कि बीजेपी किसी भी हद तक जा सकती है। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी को न सुप्रीम कोर्ट पर यकीन है और न ही संविधान पर। सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेकर यहां सेना को भेजना चाहिए।
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