अंतरराष्ट्रीय: भारत और श्री लंका के रिश्ते काफी पुराने है। भारत और श्री लंका एक दूसरे के साथ अपना सांस्कृतिक व्यवहार और आर्थिक गतिविधियों को साझा करते हैं। अभी हाल ही में जब श्री लंका भीषण आर्थिक संकट से तहिमाम कर रहा था तो भारत ने आगे बढ़कर श्री लंका की मदद की। भारत ने हमेशा श्री लंका का समर्थन किया और उसके दुख के समय उसका साथ निभाया।
लेकिन श्री लंका ने हमेशा दोस्ती से पहले अपना स्वार्थ देखा और भारत के दुश्मनों के साथ अपना प्रेम जाहिर किया। श्री लंका ने हमेशा पाकिस्तान और चीन के शिप की एंट्री को श्री लंका में आने की अनुमति दी। वही जब भारत ने श्री लंका की इस हरकत का विरोध किया तो श्री लंका अपनी सुरक्षा के मुद्दे को उठाकर स्पस्टीकरण देता है।
अभी हाल ही में भारत ने श्री लंका की एक ओर जरूरत को पूरा किया। श्री लंका को डोर्नियर 228 समुद्री निगरानी विमान की आवश्यक थी जो भारत ने 15 अगस्त को पूरी कर दी। इसके बाद श्री लंका के राष्ट्रपति रानीलसिंघे ने भारत की तारीफ के पुल बांध दिए। उन्होंने कहा, भारत और श्री लंका एक ही सिक्के के दो पहलू है। इन्हें कोई अलग नहीं कर सकता है। हम हजारे इतिहास से एक साथ है। हमारा रिश्ता मजबूत है। हमे कोई अलग नही कर सकता है।
उन्होंने अपने युवाओ को संदेश दिया। उन्होंने कहा जो युवा राजनीति में आना चाहते हैं राजनेता बनना चाहते हैं। उन्हें भारत के युवाओं, राजनेताओं से सम्पर्क साधना चाहिए। क्योंकि अगर आप बात नही करेंगे तो आपके लिए मुद्दों को समझना कठिन हो जाएगा। वह हमारा पड़ोसी देश है। हमे उसके साथ रहना चाहिए। क्योंकि भारत ने हमेशा हमारा समर्थन किया है और हमारा साथ दिया है।
उन्होंने आगे कहा, भारत विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमे भारत से सीख लेनी चाहिए। भारत अब एक ताकतवर देश बनकर उभरा है। जानकारी के लिये बता दें भारत ने हमेशा श्री लंका के साथ बेहतर रिश्ता निभाया है। लेकिन कई बार श्री लंका ने ऐसी हरकतें की है जिससे भारत को काफी दुख हुआ है। अभी हाल ही में श्री लंका ने जासूसी जहाज युआन वांग 5 को श्रीलंका में एंट्री की मंजूरी दे दी। जो भारत के लिए विचारणीय है।
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